बू
विष्णु बैरवा
भीलवाड़ा (राजस्थान)
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(लोगों की ईर्ष्या की दुष्प्रवृति पर प्रहार)
जिस दिन मिला पुरुस्कार
बू आ रही थी
मिली नौकरी जिस दिन मुझको
बू तब भी आ रही थी
कुछ जलने की
एक दिन चौपहिया क्रय कर लाया
मानो, आग भभकने लगी
बू सातवें आसमां पर थी
कल हो गई कल दुर्घटना मुझपे
माहौल सुगंधित है
मानो खिल गए सैकड़ों पुष्प साथ में।
परिचय : विष्णु बैरवा
निवासी : गांव- बराटिया, ब्लॉक- भीलवाड़ा, (राजस्थान)
कथन : मैं कल्पनाओं को शब्दों में पिरोने का प्रयास करता हूँ ।
हिंदी साहित्य की विशालता का बखान किया करता हूँ ।
घोषणा : मैं यह शपथ पूर्वक घोषणा करता हूँ कि उपरोक्त रचना पूर्णतः मौलिक है।
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