व्याकुल नर
तुकाराम पुंडलिक खिल्लारे
परभणी (महाराष्ट्र)
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व्याकुल नर -
उजड़ी शाख पर
गिरते पर हुई सुबह -
रातरानी की गंध
चूसती धूप
चारसू फैला
कोहरा ही कोहरा -
सवेरा गिला
रंग होली का -
मकान में बिखरा
गंध कितना
दानापानी ले
पंछी घोंसले लौटा -
चूजे गायब
निर्जन ताल
पंछी स्नान करते -
फूल गिरते
वर्षा में धूप -
चला रहा मनुष्य
इंद्रधनुष्य
लो लौट आयी
गरीब की खुशीयाँ -
बासी रोटीयाँ
सो गई रात -
चुलबुलाते पत्ते
चाँद का पाँव
लाॅकडाऊन -
सडक पर आये
वन के जीव
शिशू का स्पर्श
जाग उठी ममता -
सँभाले आँसू
परिचय :- तुकाराम पुंडलिक खिल्लारे
निवासी : लोकमान्य नगर, परभणी (महाराष्ट्र)
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।
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