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भाग्य विधाता
कविता

भाग्य विधाता

डॉ. भगवान सहाय मीना जयपुर, (राजस्थान) ******************** बापू मेरे भारत भाग्य विधाता। थे वे सत्य अहिंसा पथ प्रदाता। पुतलीबाई कबा गांधी के प्यारे, साबरमती के संत स्वराज दाता। बने पहचान शांति दूत सत्याग्रही, राष्ट्रपिता इन्हें जन-जन पुकारता। हमें मिला आजादी का उजियारा, चलके बापू का चरखा सूत काता। यह गाते रघुपति राघव राजा राम, जोड़े जन हित अफ्रीका से नाता। जो खेड़ा चम्पारण से शुरू किया, बन गये हर आंदोलन के प्रणेता। अंग्रेजों भारत छोड़ो उद्घोष हुआ, किये गर्जना भारत के जन नेता। घर- घर बिगुल बजा आजादी का, परदेशी का यूं छूट पसीना जाता। मचा ब्रिटिश रानी के घर हड़कंप, अंतिम गौरों ने छोड़ी भारत माता। परिचय :- डॉ. भगवान सहाय मीना (वरिष्ठ अध्यापक राजस्थान सरकार) निवासी : बाड़ा पदम पुरा, जयपुर, राजस्थान घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिक...
दीप प्रज्वलित करेंगे जरूर
कविता

दीप प्रज्वलित करेंगे जरूर

प्रभात कुमार "प्रभात" हापुड़ (उत्तर प्रदेश) ******************** हम दीप प्रज्वलित करेंगे जरूर। निर्धन, पीड़ित, शोषित की आशा और विश्वास के लिए, असहाय ,मजबूर, निर्बल की सहायता और सहारे के लिए, हम दीप प्रज्वलित करेंगे जरूर। कुव्यवस्था, अन्याय, बेबसी के शिकार, जिन पर न घर है न काम, जो हर हाल में हैं बेहाल, उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए, हम दीप हम दीप प्रज्वलित करेंगे जरूर। अंधकार में प्रकाश के लिए, राष्ट्रोत्थान की कामना के लिए, जन-गण-मन कल्याण के लिए, हम दीप प्रज्वलित करेंगे जरूर। साम्प्रदायिक सौहार्द के मानवता की मंगलकामना के लिए, जो चले गए उनकी आत्मशांति के लिए, हम दीप प्रज्वलित करेंगे जरूर। परिचय :-  प्रभात कुमार "प्रभात" निवासी : हापुड़, (उत्तर प्रदेश) भारत शिक्षा : एम.काम., एम.ए. राजनीति शास्त्र बी.एड. सम्प्रति : वाणिज्य प्रवक्ता टैगोर शिक्षा सदन इंटर कालेज हापुड़...
काश ऐसा फिर हो जाए
कविता

काश ऐसा फिर हो जाए

दीप्ता नीमा इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** खेल के मैदान में धरती माँ को चूम जाएं और हम बच्चे बन फिर बहुत धूम मचाएं उम्र के इस पड़ाव से कच्ची उम्र में लौट जाएं समय की चकरी फिर उल्टी घूम जाए काश ऐसा फिर हो जाए ।।१।। नीला आकाश देखकर मैं खो जाऊँ टिमटिम करते तारों की गिनती लगाऊं चाँद में सूत कातती अम्मा को निहारूं समय की चकरी को फिर उल्टा घूमाऊं काश ऐसा मैं कुछ कर जाऊँ ।।२।। वो बाग में तितलियों के पीछे दौड़ना वो चोरी से पड़ोसियों के फल तोड़ना वो मिटटी की गुल्लक में पैसे जोड़ना समय की चकरी का मेरा उस ओर मोड़ना काश ऐसा फिर हो जाए ।।३।। माँ के आँचल को पकड़कर के चलना गिरना संभलना फिर उठकर के चलना माँ की थपकियाँ संग माँ का वो पलना समय की चकरी का काश फिर यूँ ढलना काश ऐसा फिर हो जाए।।४।। काश मैं फिर वैसे पलकें झपकांऊ बचपन के जैसे झूमूं और गाऊं जरा सी रूठूं औ...
गांव की मिट्टी
कविता

गांव की मिट्टी

डॉ. भगवान सहाय मीना जयपुर, (राजस्थान) ******************** गांव की मिट्टी पावन चंदन लगती है। लहलहाती फसलें शत्-शत् वंदन करती है। पीपल की शीतल छांव तले, झीने घूंघट में पनिहारी स्वागत करती है। रुनझुन घुंघरू बजते पग बैलों की जोड़ी, नाचे मोर पपिया कोयल गीत सुनाती है। खेतों में निपजे हीरे मोती, मीठी-मीठी खुशबू रोटी बाजरे की आती है। सूरजमुखी शर्मिली, नवयौवना सरसों, चंचल गैंहू की बाली झुक झुक नर्तन करती है। बालू के टीले नदी किनारे अन्नदाता की जननी, मेहनत कश गांव की मिट्टी अभिनंदन करती है। नन्हे गोपालक संग धेनु चलती खेतों में, कृषक बाला गुड्डियों का ब्याह रचाती है। घनीभूत भ्रमर का गुंजन खग कल्लोल करते, गांव की मिट्टी सब का आलिंगन कर लेती है। अनजान पथिक भी पाता यहां ठिकाना, ममता का सागर उमड़े प्रेम की गंगा बहती है। परिचय :- डॉ. भगवान सहाय मीना (वरिष्ठ अध्यापक राजस्थान...
मुहब्बत
कविता

मुहब्बत

डॉ. भगवान सहाय मीना जयपुर, (राजस्थान) ******************** आंखों में थी आरज़ू मुलाकात की। सागर जानता है बेबसी बरसात की। न सही मैं बनूं हमसफ़र आपका, क्यों हुई यूं बेदखली जज़्बात की। याद आपकी आई नदी बाढ़ सी, भूलने का तरीका बता ख्यालात की। लौट के सो गए परिंदे शाम के, मैयखाने से खबर नहीं रात की। सुना हूं दीवारों के कान होते हैं, करूं किससे चर्चें इस बात की। इतनी बेगैरत नहीं मुहब्बत हमारी, चांद से पूछ्ते है तारें औकात की। रिश्तों के अदब की नजीर रह गई, नहीं दुनिया देती दाद मेरी बिसात की। परिचय :- डॉ. भगवान सहाय मीना (वरिष्ठ अध्यापक राजस्थान सरकार) निवासी : बाड़ा पदम पुरा, जयपुर, राजस्थान घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है। आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि राष्ट्रीय हिन्दी ...
राम रहीम
कविता

राम रहीम

डॉ. भगवान सहाय मीना जयपुर, (राजस्थान) ******************** दिल को घर ख़ुदा का बना लो। इंसान हो इंसान को अपना लो। मंदिर- मस्ज़िद यूं ही रहने दो, अब गले इक दूजे को लगा लो। यह नफरत की खाई पाट दो, खड़ी रंजिश की दीवार गिरा लो। मुश्किलें जो आ रही सामने, दोनों मिल बैठकर सुलझा लो। भूल से उजड़ गए जो आसियाने, फिर गुलशन ए गुलिस्तां सजा लो। राम-रहीम कंधे से कंधा मिलाकर, इक सुन्दर हिंदुस्तान बना लो। बहने दो मोहब्बत की गंगा-यमुना, अपनी दोस्ती को परवान चढ़ा लो। परिचय :- डॉ. भगवान सहाय मीना (वरिष्ठ अध्यापक राजस्थान सरकार) निवासी : बाड़ा पदम पुरा, जयपुर, राजस्थान घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है। आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपने परिचय एवं छायाचित्...
शिक्षक/ सद्गुरु
कविता

शिक्षक/ सद्गुरु

डॉ. भगवान सहाय मीना जयपुर, (राजस्थान) ******************** ओजस्वी दीपक, युग दृष्टा होते है शिक्षक। नवचेतना, ज्ञान, वैभव के धारक होते है शिक्षक। वर्ण विधान, भाषा अलंकरण होते है शिक्षक। आत्मनिर्भर, स्वाध्याय के संबल होते है शिक्षक। ज्ञान उद्दीपक, अंत प्रेरणा के विश्लेषक होते है शिक्षक। हर युग के नायक, अद्भुत चित्रकार होते है शिक्षक। कर्तव्यनिष्ठा, सृजनशीलता के परिचायक होते है शिक्षक। कच्ची मिट्टी से महलों के सृजक होते है शिक्षक। खाद और जड़ विषय संम्प्रेषक होते हैं शिक्षक। अमूर्त भावी पीढ़ी के मूर्तिकार होते है शिक्षक। ज्ञान के आलोक से अज्ञान विनाशक होते है शिक्षक। वाष्प कण से मेघों के शिल्पकार होते है शिक्षक। मां का वात्सल्य, पिता का आशीर्वाद होते है शिक्षक। नेह का अहसान, बहन का आलिंगन होते है शिक्षक। वशिष्ठ, विश्वामित्र, चाणक्य, राधाकृष्णन होते है शिक्षक। द...
प्यार का बंधन
कविता

प्यार का बंधन

दीप्ता नीमा इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** भाई-बहन का रिश्ता न्यारा लगता है हम सबको प्यारा भाई बहन सदा रहे पास रहती है हम सभी की ये आस इस प्यार के बंधन पर सभी को नाज़।। भाई बहन को बहुत तंग करता है पर प्यार भी बहुत उसी से करता है बहन से प्यारा कोई दोस्त हो नहीं सकता इतना प्यारा कोई बंधन हो नहीं सकता इस प्यार के बंधन पर सभी को नाज़।। बहन की दुआ में भाई शामिल होता है तभी तो ये पाक रिश्ता मुकम्मिल होता है अक्सर याद आता है वो जमाना रिश्ता बचपन का वो हमारा पुराना इस प्यार के बंधन पर सभी को नाज़।। वो हमारा लड़ना और झगड़ना वो रूठना और फिर मनाना एक साथ अचानक खिलखिलाना फिर मिलकर गाना नया कोई तराना इस प्यार के बंधन पर सभी को नाज़।। अपनी मस्ती के किस्से एक दूजे को सुनाना माँ-पापा की डांट से एक दूजे को बचाना सबसे छुपा कर एक दूजे को खाना खिलाना बहुत खास होता है...
मेरी जगह कहाँ है…?
कविता

मेरी जगह कहाँ है…?

दीप्ता नीमा इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** कौन हूँ मैं नादान समझ न पाऊं, कहाँ मेरी जगह है ढ़ूंढ़ न पाऊं, सदियों तलक चुपचाप रही, हर जुल्म को खामोश सहती रही, कलकल नदिया सी बहती रही, हर दर्द में भी मुस्कुराती रही।।१।। कोई दर्दे दिल की बात नहीं समझता, बिना कहे कोई जज़्बात नहीं समझता, हर ताने पर बीच में मायका आता है, मेरे मात-पिता को हर कोई सुनाता है और दिल मेरा जख्मी हो जाता है।।२।। क़ोई भी घर में कुछ गलत करने लगे, तो सब गलतियों पर नाम उसका लगे, कोई भी कभी किसी से पीछे न रहे, हर तरह के आरोप उसके ऊपर लगे, पति उनके साथ सोने पे सुहागा लगे।।३।। वो तो एक के पीछे घरबार छोड़ आती है, जन्म के नाते और पीहर छोड़ आती है, वो तो अपना सर्वस्व न्योछावर करती है, न जाने क्यों दुनिया उसे धिक्कारती है।।४।। हर बेटी के लिए मेरी यही है तमन्ना, अपने पैरों पर तुम खड़ी हो जाना, किसी के आ...
उफ! ये सावन…
कविता

उफ! ये सावन…

दीप्ता नीमा इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** वो बचपन की मस्ती, वो तोतली बोली, वो बारिश का पानी, और बच्चों की टोली, वो पहिया चलाना और नाव बनाना, माँ का बुलाना और हमारा न आना, वो अनछुए पल याद दिलाता है "उफ! ये सावन जब भी आता है"।। लड़कपन में लड़ना और फिर मचलना दोस्तों का मनाना हमें फिर मिलाना मैदान के कीचड़ में गिरना-गिराना और माँ से वो गंदे कपड़े छुपाना वो अनछुए पल याद दिलाता है "उफ! ये सावन जब भी आता है"।। यौवन की दुनिया में आकर निखरना किसी अजनबी से मिलकर बहकना दिल का धड़कना वो बेचैन होना कभी याद करके हँसना फिर रोना पापा का डाँटना और माँ का समझाना वो अनछुए पल याद दिलाता है "उफ! ये सावन जब भी आता है"।। अचानक से फिर समय का बदलना वो परिवार के साथ बाहर निकलना वो छतरी उड़ाना और भुट्टे खाना बच्चों को सावन के झूले झुलाना माता-पिता बनकर कर्तव्य निभाना वो अनछुए पल...
गजल है जिंदगी
कविता

गजल है जिंदगी

दीप्ता नीमा इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** क्या खूब "गजल है जिंदगी" मचलते दिल की तड़प है जिंदगी। कहीं खुशियों का महल है जिंदगी, कहीं आँखों से बहता काजल है जिंदगी।। क्या खूब "गजल है जिंदगी" जिंदगी भी तो एक आईना है, कुछ खरोंच आ ही जाती है। कितना भी एहतियात बरतो, पर,कुछ कसर रह ही जाती है।। क्या खूब "गजल है जिंदगी" जिंदगी में आते हैं प्यार के रहनुमा, मिलते हैं तो जिंदगी होती है खुशनुमा। न मंदिर की घंटी,न मस्जिद की धूम, हर तरफ सुनाई देती है बस प्यार की गूँज।। क्या खूब "गजल है जिंदगी" मौत तो आसाँ है जीना मुश्किल है दोस्त, हिम्मत है तो तेरे लिए सब मुमकिन है दोस्त। ठोकर लगे तो भी तू रुकना मत ए दोस्त, एक नजर तो डाल सामने मंजिल है दोस्त।। क्या खूब "गजल है जिंदगी" परिचय :- दीप्ता नीमा निवासी : इंदौर (मध्य प्रदेश) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि स...
धरती का स्वर्ग
कविता

धरती का स्वर्ग

दीप्ता नीमा इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** मत काटो तुम ये पहाड़, मत बनाओ धरती को बीहाड़। मत करो प्रकृति से खिलवाड़, मत करो नियति से बिगाड़।।१।। जब अपने पर ये आएगी, त्राहि-त्राहि मच जाएगी। कुछ सूझ समझ न आएगी, ऐसी विपदाएं आएंगी ।।२।। भूस्खलन और बाढ़ का कहर, भटकोगे तुम शहर-शहर। उठे रोम-रोम भय से सिहर, तुम जागोगे दिन-रात पहर।।३।। प्रकृति में बांटो तुम प्यार, और लगाओ पेड़ हजार। समझो इनको एक परिवार, आगे आएं हर नर और नार।।४।। पर्यावरण असंतुलित न हो पाए, हर लब यही गीत गाए। धरती का स्वर्ग यही है, पर्यावरण संतुलित यदि है।।५।। निर्मल नदिया कलकल बहता पानी, कहता है यही मीठी जुबानी। धरती का स्वर्ग यही है, पर्यावरण संतुलित यदि है।।६।। परिचय :- दीप्ता नीमा निवासी : इंदौर (मध्य प्रदेश) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरच...
माँ क्या होती है
कविता

माँ क्या होती है

गायत्री ठाकुर "सक्षम" नरसिंहपुर, (मध्य प्रदेश) ******************** कोख में रखकर नौ महीने, सौ सौ तखलीफें सह सह कर। रात रात भर, जाग-जाग कर, खुद गीले में रह-ह कर। बच्चे को सुलाती सूखे में, प्यार भरी थपकी देकर। बड़े चाव से सेवा करती, कभी न उसमें नागा करती। हो जाए बड़ा, कितना ही बालक, हर विपदा से उसे बचाती, बन करके, उसका रक्षक। नहीं है कोई दुनिया में, उसके जैसा, त्याग, तपस्या और प्रेम की मूरत जैसा। माथे पर उसके, देख शिकन, हो जाती व्याकुलता से बेचैन। बालक के सुख से होती सुखी, बालक के दुख से होती दुखी। माँ की कीमत वो ही जाने, मिली न "सक्षम" जिन्हें देखने। परिचय :- गायत्री ठाकुर "सक्षम" निवासी : नरसिंहपुर (मध्य प्रदेश) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है। आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि राष्ट्रीय हिन्दी ...
हाहाकार
कविता

हाहाकार

आशा जाकड़ इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** कोरोना ने मचाया हाहाकार कृष्णजी लगा दो नैया पार बेचारे बच्चे पूछ रहे हैं कब हम बाहर निकलेंगे? कब हम स्कूल जाएंगे ? कब हम मैदान में खेलेंगे ? सुन लो भक्तों की पुकार कृष्णजी लगा दो नैया पार।। बड़े -बूढ़े प्रार्थना कर रहे, घर में कब तक बंद रहेंगे? हाथ धोए सब परेशान हुए शुद्ध हवा कब सांस लेंगे ? जीना हो गया अब दुश्वार, कृष्णजी लगा दो नैया पार।। मजदूर बेचारे बिलख रहे दाने -दाने को तरस रहे हैं। कामकाज सब छूट गए, घर बार अब टूट रहे हैं।। दाने-दाने को हुई दरकार कृष्णजी लगा दो नैया पार।। जब-जब होवे धर्म की हानि तब तब तुम जग में आते हो कोरोना दानव ताण्डव नृत्य क्यों नहीं अब चक्र उठाते हो? वादे को करो अब साकार। कृष्णजी लगा दो नैया पार।। मानवता अब जाग गई है सर्वत्र सेवा भावना आ गई डॉक्टर, पुलिस, कर्मचारी तन मन...
मौत
कविता

मौत

डॉ. भगवान सहाय मीना जयपुर, (राजस्थान) ******************** बैठे है कब से मेरे सिरहाने आस-पास वे भी, जिन्हें फुर्सत ना थी कभी मुझसे मुलाकात की। जिन्हें पसंद ना थी मेरी शक्ल फूटी आंख भी, अब दर्शन को भीड़ लगी है सारी कायनात की। जिनसे तोहफे में नसीब ना हुआ इक बोल भी, आज वे भी मुझ पर बरसा रहे फूल कचनार की। तरसे- रोये है मुश्किलों में हम एक कन्धे को, और अब बानगी देखिए जरा हजारों कन्धों की। कल दो कदम साथ चलने वाला ना था कोई, अब गणना असंभव है साथ चल रहे कारवां की। कमबख्त जिंदगी मौत से बदत्तर लगी आज, कितने रो रहे यहां कमी नहीं चाहने वालों की। परिचय :- डॉ. भगवान सहाय मीना (वरिष्ठ अध्यापक राजस्थान सरकार) निवासी : बाड़ा पदम पुरा, जयपुर, राजस्थान घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है। आप ...
जल
कविता

जल

डॉ. भगवान सहाय मीना जयपुर, (राजस्थान) ******************** प्राणों का आधार जल है। आज जल है तो कल है। जल नहीं तो कल नहीं, जब जीवन रक्षक जल है। पंच तत्त्व की काया को, परिपूर्ण करता जल है। सत्य बात आप पहचाने, प्रकृति का सृजक जल है। बिन पानी दुनिया न बनती, ईश्वर का वरदान जल है। कुएं बावड़ी सागर नदियां, इन सब का स्वरूप जल है। प्रकृति का मानक तत्त्व, फसलों का लहलहाना जल है। बिन पानी अन्न नहीं उपजे, वृक्ष पुष्प पर्ण कानन जल है। अमृत नीर जगत का सानी, पृथ्वी पर जीवन दानी जल है। सब इसे बचाने को करें जतन, जब अनमोल संपदा जल है। जल ही जीवन सत्य है, प्राकृतिक सौगात जल है। मत बहाओ मुझे बेकार, जल भी करता पुकार है। परिचय :- डॉ. भगवान सहाय मीना (वरिष्ठ अध्यापक राजस्थान सरकार) निवासी : बाड़ा पदम पुरा, जयपुर, राजस्थान घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिक...
पुलवामा के वीर सपूत
कविता

पुलवामा के वीर सपूत

डॉ. भगवान सहाय मीना जयपुर, (राजस्थान) ******************** पुलवामा के वीरों से, घात करें थे घाटी में। बैठे गोडसे दिल्ली में, जयचंद पावन माटी में। गीदड़ पहुंचे शेरों तक, छल कर तेरी गोदी में। हंसते-हंसते शहादत पाये, नगराज की चोटी में। गंगा-यमुना चीख उठी, सिंदूर मिली जब माटी में। भेंट चढ़ थी कितनी राखी, जन्नत तेरी छाती में। बेबस बूढ़ी आंखें छलकी, इन वीरों की यादों में। बिलख-बिलख मां रोई, उम्मीदे बिखरी लाशों में। नन्हीं-नन्हीं परियां चीखी, सपने मिल गये माटी में। हिंदुस्तानी धरती रोये, इन शेरों की शहादत में। कदम उठा लो अंतिम, गोली दागो दुश्मन में। अब मत खोजो मानवता, इन नरभक्षी गिर्द्धो में। परिचय :- डॉ. भगवान सहाय मीना (वरिष्ठ अध्यापक राजस्थान सरकार) निवासी : बाड़ा पदम पुरा, जयपुर, राजस्थान घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेर...
किसान
कविता

किसान

डॉ. भगवान सहाय मीना जयपुर, (राजस्थान) ******************** भूमि पुत्र के छालों से सजे हाथ देख लेते। कृषि बिल से पूर्व कूछ कृषक से पूछ लेते। जन्म मां ने दिया पोषण अन्नदाता ने किया, कुलिस कर्म उस हलधर को पहचान लेते। रोती जिसकी खुशियां सूदखोर की चौखट पर, सदियों से मौन सह रहा संताप उसे जान लेते। गरीबी, भूखमरी, कष्ट-कसक ही परिजन, वेदना अंतहीन श्रमरत हलवाह देख लेते। कंटकाकीर्ण पथ पर बेचता आशाओं को, तन हड्डियों की गठरी कृषिजीवी जान लेते। तलाश करता सुकुन धरा चीरकर जो, कर्म के रथ पर आरूढ़ हो आह! सह लेते। अच्छे दिन की आस में बनाकर सरकार तुम्हारी, महाजन की बही में अंगुठा गिरवी रख देते। श्रमसाधक चित्रकार जो सबकी जिंदगी का, अन्नदाता धरती का रखवाला पहचान लेते। परिचय :- डॉ. भगवान सहाय मीना (वरिष्ठ अध्यापक राजस्थान सरकार) निवासी : बाड़ा पदम पुरा, जयपुर, राजस्थान घोषणा पत...
बेटियां
कविता

बेटियां

डॉ. भगवान सहाय मीना जयपुर, (राजस्थान) ******************** मंदिर की आरती, मस्जिद की नमाज होती है बेटियां। जिंदगी का गान, दुनिया की आवाज होती है बेटियां। प्रकृति की नींव, मानवता की आधार होती है बेटियां। सभ्यता और संस्कृति की शुरुआत होती है बेटियां। आस्था की प्रतीक, हर धर्म की लाज होती है बेटियां। संसार सागर में, मानव नैया की पतवार होती है बेटियां। हृदय का भाव, बाबूल के सिर का ताज होती है बेटियां। भाई का अभिनंदन, मां की मुस्कान होती है बेटियां। सास की सौगात, ससूर की नाज होती है बेटियां। आंखों की चमक, चेहरे का नूर होती है बेटियां। रिश्तों के सागर में स्नेहिल पानी होती है बेटियां। हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई का त्योहार होती है बेटियां। चांद की चांदनी, सूरज की रोशनी होती है बेटियां। वात्सल्य का सागर, ममता की नदी होती है बेटियां। हाथों की रेखाएं, हर की तकदीर हो...
इक्कीसवीं सदी
कविता

इक्कीसवीं सदी

डॉ. भगवान सहाय मीना बाड़ा पदम पुरा, जयपुर, (राजस्थान) ******************** इक्कीसवीं सदी को लगा इक्कीसवां साल। आपको हृदय से मुबारक हो यह नया साल। अभिनंदन नववर्ष नव उमंग उम्मीद किरण, करूं अलविदा शत्-शत् नमन पुराने साल। यह काल याद रखेंगी मानव तेरी पीढ़ियां, चंद्रमा का कलंक सदी में यह बीसवां साल। घबराया महामानव प्रकृति चित्कार उठीं, जैसे- तैसे गुजर गया दानव कातिल साल। सदी में यम का जाल कोरोना काल, समय भी याद रखेगा यह बीसवां साल। आओ पधारों सुस्वागतम नूतन वर्ष, तुझे अंतिम सलाम अलविदा रुग्ण साल। हे प्रभु नववर्ष में हर जन खुशहाल रहे, प्रकृति भी संभलें भूलकर यह बीता साल। इक्कीसवीं सदी को लगा इक्कीसवां साल, आपको हृदय से मुबारक हो यह नया साल। परिचय :- डॉ. भगवान सहाय मीना (वरिष्ठ अध्यापक राजस्थान सरकार) निवासी : बाड़ा पदम पुरा, जयपुर, राजस्थान घोषणा पत...
मां
कविता

मां

डॉ. भगवान सहाय मीना बाड़ा पदम पुरा, जयपुर, (राजस्थान) ******************** मां की परिभाषा संसार। ममता ईश्वर का आकार। मां करती जीवन साकार। बिन तेरे यह जग बेकार। मां ईश्वर का अहसास, जन्नत होता मां का प्यार। मां..... मां बिन प्रभु भी लाचार। चुकता नहीं मां का उपकार। मां खुश होती है, जग में जीवन अपना वार। मां..... मां अनगिनत तेरे प्रकार। तूं ही दुनिया की सरकार। भिन्न नहीं ईश्वर से मां, बनता नहीं बिन मां संसार। मां..... संतान में मां होती संस्कार। मां ही जग की तारनहार। प्रकृति संवारने में होती, ईश्वर को मां की दरकार। मां की परिभाषा संसार। ममता ईश्वर का आकार। परिचय :- डॉ. भगवान सहाय मीना (वरिष्ठ अध्यापक राजस्थान सरकार) निवासी : बाड़ा पदम पुरा, जयपुर, राजस्थान घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौ...
हिंदी राष्ट्र धरोहर है
कविता

हिंदी राष्ट्र धरोहर है

डॉ. भगवान सहाय मीना बाड़ा पदम पुरा, जयपुर, (राजस्थान) ******************** हिंदी है वैज्ञानिक भाषा, भारत की पहचान है। लिपि इसकी देवनागरी, देवों की यह शान है। ब्रह्म गुप्त कुटिल से जन्मी नागर, सरल व्याकरण, इसका सुन्दर वर्ण विधान है अष्टम् अनुसूची में हिंदी राजभाषा, अक्षर-अक्षर करती भारत का गुणगान है। हिंदी भारत मां की सुन्दर बिंदी, हिन्द हिंदी हिन्दुस्तानी, भारत का अभिमान है। युगों-युगों से दुनिया की शिक्षा हिंदी, हिंदी रक्षक अपने देश का संविधान है। गागर में सागर भरती हिंदी, हिंदी राष्ट्र धरोहर है, विश्व में इसका मान है। कबीर पद मानस चौपाई हिंदी, हिंदी है देवों की भाषा पावन इसका धाम है। दुनिया में हिंदी का परचम लहराये, अजर अमर हो हिंदी, यह भारत की जान है। हिंदी सिखाती संस्कृति जगत को, विश्व सरगम भारत, हिंदी इसका गान है। परिचय :- डॉ. भगवान सहाय मीना (वरिष्ठ...
गुरु नवचेतना वर दो
कविता

गुरु नवचेतना वर दो

आशा जाकड़ इंदौर म.प्र. ******************** ज्ञान चाहता है अंतर्मन हर्षित हो जाएं जन जन करते मन में हम यह प्रण शिक्षा का करें अभिनंदन अनुपम प्रकाश भर दो गुरु नवचेतना वर दो। चारों ओर है घोर अंधेरा कर सकते हो तुम उजेरा ज्ञान का होवे यहाँ बसेरा सुख सूर्य का रोज सवेरा ऐसी शक्ति भर दो। गुरु नवचेतना वर दो। नफरत और ईर्ष्या मिट जाए ऊंच-नीच का फर्क मिट जाए जाति-पांति का भेद मिटजाए परस्पर समता भाव लहराए ऐसा ज्ञान भर दो। गुरु नवचेतना भर दो। आज समय की मांग पुकारे कर सकते हो तुम्हें उबारे तुम्ही हो भारत के रखवाले राष्ट्र निर्माता पूज्य हमारे ऐसे गुरु भक्ति दो। गुरु नवचेतना भर दो।। जगती का उद्धार तुम्हीं हो मुक्ति का सही मार्ग तुम्हींहो प्रेम का सद्व्यवहार तुम्हीं हो नैया की पतवार तुम्हीं हो बुद्धि विकास वर दो। गुरु नवचेतना वर दो।। परिचय :- आशा जाकड़ (शिक्षिका, स...
गजानन सुनलो हमारी पुकार
कविता

गजानन सुनलो हमारी पुकार

आशा जाकड़ इंदौर म.प्र. ******************** गजानन सुनलो हमारी पुकार। गजानन लाओ खुशियां अपार।। विघ्नों के हर्ता हो कष्टों के हर्ता हो मंगलदायक तुम सुखों के कर्ता हो भर दो समृद्धि का भंडार गजानन लाओ खुशियांँ अपार।। कोई काम शुरू हम करते पहले नाम तुम्हारा ही लेते हर संकट करे निवार। गजानन लाओ खुशियाँ अपार।। अज्ञान का छाया है अंधेरा कर सकते हो तुम्ही उजेरा ज्ञान की रोशनी अपार गजानन लाओ खुशियाँ अपार।। विपदाओं का लगा है डेरा कोरोना का है रूप घनेरा। कृपा की कर दो बौछार। गजानन लाओ.खुशियां अपार। कोरोना को तुम दूर भगाओ कष्टों से तुम मुक्ति दिलाओ करो मानवता का उद्धार गजानन लाओ खुशियां अपार गजानन सुन लो हमारी पुकार।। परिचय :- आशा जाकड़ (शिक्षिका, साहित्यकार एवं समाजसेविका) शिक्षा - एम.ए. हिन्दी समाज शास्त्र बी.एड. जन्म स्थान - शिकोहाबाद (आगरा) निवासी - इंदौर म.प्र....
आओ साथी अयोध्या चलकर राम- पर्व मनाएँ
कविता

आओ साथी अयोध्या चलकर राम- पर्व मनाएँ

आशा जाकड़ इंदौर म.प्र. ******************** राम हमारी अयोध्या जन्मे कण-कण राम बसे हैं, सरयू नदी के तट पे अयोध्या पावन नगरी बसे हैं। पावन नगरी अयोध्या को हम राम- नगरी बनाएँ, आओ साथी अयोध्या चलकर राम- पर्व मनाएँ। राजा दशरथ परम प्रतापी अयोध्या नरेश हुए थे, कैकेई सुमित्रा और कौशल्या के चार पुत्र हुए थे। राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न के दर्शन कर आएँ, आओ साथी अयोध्या चलकर राम- पर्व मनाएँ। राम हैं मर्यादा पुरुषोत्तम परम पूज्य कहलाए, सीता मैया आदर्श जननी जग में पूजी जाएँ। राम सीता के मंदिर को हम जाकर शीश नवाएँ, आओ साथी अयोध्या चलकर राम- पर्व मनाएँ। राम की महिमा गाने से ही कष्ट निवारण होता, राम नाम लेने से ही बस मोक्ष प्राप्त हो जाता। हम भी आज राम दर्शन से थोड़ा पुण्य कमाएँ, आओ साथी अयोध्या चलकर राम पर्व मनाएँ। परिचय :- आशा जाकड़ (शिक्षिका, साहित्यकार एवं समाजसेविका) शिक्षा -...