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Tag: राधेश्याम गोयल “श्याम”

होली फागुन का त्योहार
गीत, छंद

होली फागुन का त्योहार

राधेश्याम गोयल "श्याम" कोदरिया महू (म.प्र.) ******************** होली- छंद होली फागुन का त्योहार, फागुन आवे रंग जमावे चलत बसंती बयार........ होली फागुन का..... पतझरे पेड़ पल्लवित हो रहे, बागों में फूल प्रफुल्लित हो रहे। महुए मद में रहे गदराए, आई अमराई में बहार........ होली फागुन का...... सरसों पीली फूल रही है, गेहूं की बाली झूल रही है। लाली पलास की मन को मोहे, किया सृष्टि ने श्रंगार........ होली फागुन का....... नव यौवन मन में हरशावे, होली को आनंद मनावे। एक दूजे पर रंग डाल, करे खुशियों का इजहार........ होली फागुन का....... पेड़ों को कटने से बचाए, पर्यावरण को स्वच्छ बनाए। डाल बुराई सब होली में, जलाएं होली अबकी बार......... होली फागुन का त्योहार फागुन आवे रंग जमावे चलत बसंती बयार। होली फागुन का त्योहार। परिचय :- राधेश्याम गोयल "श्याम" निवासी - कोदरिया म...
श्याम करी बरजोरी
छंद

श्याम करी बरजोरी

राधेश्याम गोयल "श्याम" कोदरिया महू (म.प्र.) ******************** होली- छंद होरी पे श्याम करी बरजोरी, बहियां मोरी झटकी चुनर रंग बोरी। मैं बोली की श्याम करो न ठिठोली, अंगिया संग भीग गई मेरी चोली। वो बोले प्रिये अब होली सो होली, मन काहे मलाल करो हमजोली। गर बीत गए दिन यूं ही रंगीले तो, अगले बरस फिर आएगी होली। रंग डार के आज भिगोए गयो, अंग मसक गयो सखी मोर अनारी। मुख लाल गुलाल लगाय गयो, मोरी फारी गयो सखी पचरंग सारी। फाग में आग लगाय गयो, ऐसी नैनन मार गयो वो कटारी। मो संग नेह बढ़ाई गयो सखी, मारी के श्याम प्रित पिचकारी। परिचय :- राधेश्याम गोयल "श्याम" निवासी - कोदरिया महू (म.प्र.) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है। आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अ...
शहीद दिवस पर नमन
गीत

शहीद दिवस पर नमन

राधेश्याम गोयल "श्याम" कोदरिया महू (म.प्र.) ******************** मुक्तक: असर खुशबू का जेहनों से उड़ाया जा नही सकता, शहीदों की शहादत को भुलाया जा नही सकता। वतन के वास्ते जो मर मिटे है, हक की राहों में, कभी उपकार को उनके भुलाया जा नही सकता। गीत: कोटि नमन माताओं को थे, जिनके तीनो लाल, कर गए कैसे-कैसे कमाल। हंसते-हंसते फांसी चढ़ गए, किया न तनिक मलाल, बन गए अंग्रेजो के काल। भगतसिंह, राजगुरु, सुखदेव, जिनके थे प्रेरक अर्जन देव। मन में था, राष्ट्र प्रेम सदैव, जिनको था, प्यारा सत्य मेव। वंदे मातरम बोल वतन पे तीनो हुए निहाल..... कर गए कैसे-कैसे कमाल जिन्हे था चढ़ा बसंती रंग, स्वराज की पी गए ऐसी भंग। नशे में हो गए मस्त मलंग, ठानली अंग्रेजो से जंग। सांडर्स को बे मौत जा मारा, बदला लिया निकाल... कर गए कैसे-कैसे कमाल हुकूमत बरतानिया घबराई, सांडर्स की मौत से थी खि...
खुद बुलंद कर हौसला
मुक्तक

खुद बुलंद कर हौसला

राधेश्याम गोयल "श्याम" कोदरिया महू (म.प्र.) ******************** दुरियो को दूर कर दिल से मिटाले फासला, न घबरा गम की आंधियों से खुद बुलंद कर हौसला। दौर तो आते रहेंगे और टल भी जायेंगे, शोर तो होते रहेंगे जलजले जल जाएंगे। आज हिम्मत से तु अपनी फिर बनाले घोंसला...... चह चहा हट जो हुई है फिर से वो आजाएगी, चमन में पतझड़ भी होगा, फिर बहार आएगी। माली को मत दोष दे तू खुद ही करले फैसला........ वक्रता पहले भी समय की ऐसी ही देखी गई, मिटती इंसानों की बस्ती आबाद फिर से हो गई। घाव भर जाते समय से, गर हो मन में हौसला........ ये समय भी आया हे तो कुछ तो देकर जाएगा, दानवता को मानवता का पाठ भी पढ़ाएगा। सकारात्मक सोच रख तु मन में अपने जोशला........ धैर्य, धर्म को त्याग कर, धारणी रहा खंगाल, पाकर वेदों की पूंजी भी अब तक रहा कंगाल। समय तुम्हारे हाथ हे मानव, अब भी करले फैसला...... न घबरा ...
खुला चिट्ठा
कविता

खुला चिट्ठा

राधेश्याम गोयल "श्याम" कोदरिया महू (म.प्र.) ******************** १४ फरवरी २०१९ पुलवामा आतंकी हमले के बाद, हमारे सैनिकों के द्वारा २६ फरवरी २०१९ सर्जिकल स्ट्राइक के दौरान पाक सैनिकों को उनके घर में घुसकर मारा, उस समय सेना पर आक्षेप और पाक सैनिकों के मरने के सबूत मांगना तथा चाइना जाकर उनसे हाथ मिलाना ऐसे सभी कार्य जो विपक्ष के द्वारा किए गए, उसी दौरान, विपक्ष के कार्यों का खुला चिट्ठा बगैर किसी का नाम लिए आपके सामने प्रस्तुत कर रहा हूं, ये उन शहीदों को आत्मीय श्रद्धांजली है जो १४ फरवरी २०१९ को पुलवामा में शहीद हो गए। आजादी की नाव डूब रही, देश दोही हत्यारों से, आक्षेप लग रहे नित सेना पर, घर के इन गद्दारों से। नेक इरादे हे नही इनके, हिंदुत्व में फोड़ा पटकाया, राष्ट्र हित के अच्छे कार्यों में हरदम रोड़ा अटकाया। भूखे है सत्ता के सत्ताधर्म निभाना क्या जाने, सीमा पर शहीद हो स...
कलम से प्रहार कर
कविता

कलम से प्रहार कर

राधेश्याम गोयल "श्याम" कोदरिया महू (म.प्र.) ******************** साहित्य के सम्रांगण में कलम से तू वार कर, भारत के नव प्रांगण में शिक्षा का तू प्रचार कर। हे चाणक्य के वंशज न डर कर न हार कर, देशद्रोही कंटको पर कलम से तू वार कर। सत्य की मशाल से अज्ञान तम को दे मिटा, तेज आंधी तूफ़ान में तू कदम न पीछे हटा चूम ही लेगी सफलता एक दिन तेरे कदम, स्वाभिमान को रख बचा व्यक्तित्व को संवार कर सीमा पर सैनिक अड़े है राष्ट्र रक्षा के लिए, दुश्मनों से हर पल लड़े है राष्ट्र रक्षा के लिए। ऐसे में गद्दार कोई गोपनीयता बेचकर, दो कलम से मौत उसको और चड़ा दो दार पर। कलम के सिफाही हो कलम कभी न बेचना, जुल्म के आगे झुके न, हो सर कलम न सोचना। बिक गई गर लेखनी, यदि चंद सिक्कों के लिए, तो रक्षक भी वतन के होंगे, पस्त एक दिन हारकर। जीती हे पहले भी हमने कितनी ही बाजी हार कर, कवि कलम से जीती बाजी पृ...
बारा मासी गीत
गीत

बारा मासी गीत

राधेश्याम गोयल "श्याम" कोदरिया महू (म.प्र.) ******************** तुम्हारे बिन मै न जियुंगी दिलों जानी, जैसे मछली बिन पानी। हो पिया जैसे मछली बिन पानी.......तुम्हारे बिन....... चैत्र, बैसाख ऐसे बीते आई याद सुहानी, कोयल, पपिहा की वाणी सुनकर हो गई पानी पानी... तुम्हारे बिन...... जेठ असाड़ बड़ पीपल पूजे, कई मानता मानी, धूं-धूं करके महीने बीते, जैसे काला पानी.......... तुम्हारे बिन....... सावन भादों में बरखा आई, लाई याद पुरानी, झूले पड़ गए नीम पुराने,चहुं और पानी ही पानी....... तुम्हारे बिन........ कुंवार कार्तिक शरद ऋतु आई, ठंडी हुई मनमानी, मेला देखन सब सखी जावे, मै बैठी अनमानी........ तुम्हारे बिन........ अगहन पोष मास जब आए, बड़ गई मन हैरानी, छोटे दिवस रैन भई लंबी, कठिन हुई जिंदगानी........ तुम्हारे बिन........ माघ फागुन बसंत ऋतु आई, रंगो ने चादर तानी, "श्याम" हो...