अपनी धुन में जीलो
बृजेश कुमार सिंह
करण्डा, गाजीपुर (उत्तर प्रदेश)
********************
कहते है सब लोग,
समय बङा बलवान..
मन मे आया एकदिन
विचार अति महान्..
क्यूँ न मै भी
समय का साथी बनजाऊॅ..
उसके साथ-साथ चलकर
बलवान क्यूँ न कहलाऊॅ.?
फिर क्या था जीवन में..?
उठना चलना 'समय' के संग मे..
'समय' संग चलने के चक्कर मे,
कितनी खुशियों को खोया मैं..
जीवन को गमों मे डुबोया मैं..
चलते-चलते थक हार गया..
व्यर्थ मे ये जीवन गुजार गया..
आगे बढता 'समय' यह ताङ गया..
मेरा हमराही अब तो हार गया..
'समय' ने मुझको यह समझाया,
"मेरे साथ-साथ क्यूँ चलता आया..
मेरी नियति तो चलना है ..
पर तुमको तो एकदिन मरना है..
मेरा साथ पकङने से
सोचो तुम क्या पा जाओगे ?
जो कुछ कमाया तूने
सब छोड़ यहीं पर जाओगे..
अपनी धुन में जीलो प्यारे..
ये जीवन न दुबारा पाओगे..!!"
परिचय :- बृजेश कुमार सिंह
निवासी : करण्डा, गाजीपुर...