नाव
संजय वर्मा "दॄष्टि"
मनावर (धार)
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घर आंगन जो बुहारे गए
धूल भरी आंधी सूखे पत्तों संग
कागज के टुकड़ों को
बिखेर जाती पागल हवा।
सूने आंगन में
बुहार कर सोचता हूं
कागज की नाव बना लू
पानी से भरे
गड्ढों को ढूंढता हूं।
हम तो बच्चे थे
तब कागज की नाव चलाते
जल बचाएंगे तभी
सब की नाव सही तरीके से चलेगी
जल बचाएंगे तो ही
आने वाली पीढ़ी के बच्चे
नाव बनाना और
चलाना भी सीख पाएंगे।
परिचय :- संजय वर्मा "दॄष्टि"
पिता :- श्री शांतीलालजी वर्मा
जन्म तिथि :- २ मई १९६२ (उज्जैन)
शिक्षा :- आय टी आय
व्यवसाय :- ड़ी एम (जल संसाधन विभाग)
प्रकाशन :- देश-विदेश की विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएँ व समाचार पत्रों में निरंतर पत्र और रचनाओं का प्रकाशन, प्रकाशित काव्य कृति "दरवाजे पर दस्तक", खट्टे मीठे रिश्ते उपन्यास कनाडा-अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विश्व के ६५ रचनाकारों में लेखन...