अमृत
रेखा दवे "विशाखा"
इंदौर (मध्य प्रदेश)
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अमृत अगर पाना है,
तो विष भी पीना ही है l
धन्य धरा हो जाती है,
जब जन पुरुषार्थी आते है l
माना जीवन दुःसहय है,
नहीं वह विष से कम है l
नीलकंठ बन बढ़ना है,
कठिन को सरल बनाना है l l
तपता सोना, तपता लोहा,
तपता सूरज देव है l
तप तप कर ही ऋषि मुनि ने,
पाया जीवन का धैय है l l अमृत
अमृत अगर पाना है,
तो विष भी पीना ही है l
धन्य धरा हो जाती है,
जब जन पुरुषार्थी आते है l
माना जीवन दुःसहय है,
नहीं वह विष से कम है l
नीलकंठ बन बढ़ना है,
कठिन को सरल बनाना है l l
तपता सोना, तपता लोहा,
तपता सूरज देव है l
तप तप कर ही ऋषि मुनि ने,
पाया जीवन का धैय है l l
परिचय :- श्रीमती रेखा दवे "विशाखा"
शिक्षा : एम.कॉम. (लेखांकन) एम.ए. (प्राचीन इतिहास एवं अर्थ शास्त्र)
निवासी : इंदौर (मध्य प्रदेश)
वर्तमान में : श्री मा...