मानवता का गान
प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे
मंडला, (मध्य प्रदेश)
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मानवता को जब मानोगे, तब जीने का मान है।
जात-पात का भेद नहीं हो, मिलता तब यशगान है।।
भेदभाव में क्या रक्खा है, ये बेमानी बातें हैं।
मानव-मानव एक बराबर, ऊँचनीच सब घातें हैं।।
नित बराबरी को अपनाना, यह प्रभु का जयगान है।
जात-पात का भेद नहीं हो, मिलता तब यशगान है।।
दीन-दुखी के अश्रु पौंछकर, जो देता है सम्बल।
पेट है भूखा,तो दे रोटी, दे सर्दी में कम्बल।।
अंतर्मन में है करुणा तो, मानव गुण की खान है।
जात-पात का भेद नहीं हो, मिलता तब यशगान है।।
धन-दौलत मत करो इकट्ठा, नहीं खुशी पाओगे।
जब आएगा तुम्हें बुलावा, तुम पछताओगे।।
हमको निज कर्त्तव्य निभाकर, पा लेनी पहचान है।
जात-पात का भेद नहीं हो, मिलता तब यशगान है।।
शानोशौकत नहीं काम की, चमक-दमक में क्या रक्खा।
वही जानता सेवा का फल, जिसने है इसको चक्खा।।
देव नहीं,म...