हर्षोल्लास
कु.चन्दा देवी स्वर्णकार
जबलपुर (मध्य प्रदेश)
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मेरी चिरैया सोन चिरैया मनभावन है
वह पर्यावरण की प्यारी चिरैया
पर्यावरण में नैसर्गिक ताकि न होती तो
तो तुम गौरैया
कहाँ से आती आज प्रदूषण में
कहां चली गई तेरी कूक से ही
तो कोयल कूक तेरी कोख से ही तो
सरगम बना तेरी ची्ची की आवाज में ही
तो वैज्ञानिक को वैज्ञानिकता दी
और तेरी ही कूक से गायकों का अवतरण हुआ.
आज ही केदिन अलका याग्निक का भी "हुआ
तेरी "दिवस पर है वैज्ञानिक का भी दिवदिवस
न्यूटन का पुन्यतिथि का दिवस
शायद वह भी आज अचंभित है
शायद वह भी इस प्रदूषित संसार से दुखी होकर चला गया
भौतिकवादी इस दुनिया ने
तुझे ७०% मार दिया और विश्व पटल पर
एक प्रश्नवाचक चिन्ह दिया आखिर क्यों आखिर क्यों?
छत पर आंगन पर ,घर के अंदर बाहर, राज्य था हमारा
तेरे साथ साथ होली खेलते तुम हमारे साथ से
दाना चुगती बचपनमें हम तुम एक साथ थे
अलमस्त इस जीवन की शै...