
रूपेश कुमार
चैनपुर, सीवान (बिहार)
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होली आई रे आई रे होली आई रे,
जीवन को रंगों से रंगायी रे,
मन मे पुलकित पंख लगायी रे,
लाल हरा रंग रंगाई रे !
होली आई रे आई रे होली आई रे,
मन तन के दिल मे आग लगायी रे,
जीवन को मदहोश करायी रे,
मन में बसंत बहार लायी रे !
होली आई रे आई रे होली आई रे,
जीवन को सातों रंगों से रंग मे मिलाई रे,
प्यार और भाईचारे का नदियाँ बहाई रे,
हिंदू-मुस्लिम का भेदभाव मिटायी रे !
होली आई रे आई रे होली आई रे,
रिश्ते नाते को एक डोरे मे बाधि रे,
मंदिर मस्जिद को अपनाई रे,
दिल मे दुनिया-जहान को समाई रे !
होली आई रे आई रे होली आई रे !
परिचय :- रूपेश कुमार
शिक्षा : स्नाकोतर भौतिकी, इसाई धर्म (डिप्लोमा), ए.डी.सी.ए (कम्युटर), बी.एड (महात्मा ज्योतिबा फुले रोहिलखंड यूनिवर्सिटी बरेली यूपी) वर्तमान-प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी !
निवास : चैनपुर, सीवान बिहार
सचिव : राष्ट्रीय आंचलिक साहित्य संस्थान
प्रकाशित पुस्तक : मेरी कलम रो रही है
सम्मान : कुछ सहित्यिक संस्थान से सम्मान प्राप्त !
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है।
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