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नया वर्ष मुबारक हो

अख्तर अली शाह “अनन्त”
नीमच

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नये वर्ष का नया सूर्य यूं किरणे नई बिखेरे।
गमके अंधियारे मिट जाएं खुशियां डाले डेरे।।
सुख सागर में जीवन नौका बढे निरंतर आगे।
बगियामें गुल खिलने वाले रहें न कोई अभागे।।
समृद्धि की अमर बेल फिर जीवन पे छा जाये।
फिरअभावकी असि नकोई जख्मकभी देपाये।।

नूतन स्वर सुख के फूटे कानों में अमृत घोलें।
जीवन कानन में अवसर के मोर पपीहे बोलें।।
प्यारमिले सागर से गहरा मीत मिले सुखदायी।
दूर रहे तन मन से दर्दों की काली परछाई।।
इतनीमिले संपदा निशदिन घर छोटापड़ जाये।
पांव उठानेसे पहले मंजिल चलकर खुद आये।।

नवगतिनवलय अवचेतन मनको करदें स्पंदित।
मनवीणा की मधुररागिनी तनकरदेआल्हादित।।
आराधन करते करते आराध्य बने आराधक।
फर्क मिटे दोनों में दाता कौन, कौन है याचक।।
पीकर अमर प्रेम की हाला देह अमर हो जाये।
जीवन मरण चक्र से जीवन ऊपर हो मुस्काये।।

परिचय :- अख्तर अली शाह “अनन्त”
पिता : कासमशाह
जन्म : ११/०७/१९४७ (ग्यारह जुलाई सन् उन्नीस सौ सैंतालीस)
सम्प्रति : अधिवक्ता
निवासी : नीमच जिला- नीमच (मध्य प्रदेश)


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