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कविता

मुस्कुरा रहा वतन
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मुस्कुरा रहा वतन

==================== रचयिता : कार्तिकेय त्रिपाठी 'राम' हरी-भरी वसुंधरा को देख कर मेरा वतन, मुस्कुरा रहा है ऐसे फूल का कोई चमन। हर जवान देखता है सीना तानकर यहां, आजाद,भगत,बोस ने जन्म लिया है जहां। जमीं है मेरे प्यार की जमीं है मेरे दुलार की, महक ये बिखेरती प्रेम,पावन,प्यार की। ये धरा भी देखो हमको कैसे यूं लुभा रही, छा रही अमराई है गंगा सुधा बरसा रही। इसका थोडा़ गुणगान करें और इसका मान धरें, गीत भी अर्पण करें और मन दर्पण करें। पा रहें हैं इससे मनभर खुशियों का जहान हम, रक्त रंजित ना धरा हो इसका धरें ध्यान हम। संजीवनी है ये धरा मुस्कानों से भर दें घडा़, इससे बढ़कर कुछ नहीं है इस धरा पर है धरा। पाकर धरा पर हम ये जीवन जीते ही तो जा रहे, शीर्ष पर फहरा तिरंगा हिन्द जन मुस्का रहे। लेखक परिचय :- कार्तिकेय त्रिपाठी 'राम' जन्म - ११.११.१९६५ इन्दौर पिता - श्री सीताराम त्रिपाठी पत्नी - अनिता, पु...
जन्मे कुअँर कन्हाई
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जन्मे कुअँर कन्हाई

==================== रचयिता : मनोरमा जोशी बृज मे बटत बधाई, जन्मे कुअँर कन्हाई। आँधी रात घणी बरसात, जमना खल खल उबराई, जन्मे कुअँर कन्हाई। कारागृह के बंद द्धार, बिन चाबी ताले खुल गये, अदभुत लीला रचाई, जब जन्मे कुअँर कन्हाई। जहाँ जन्म लिया वहां पिया दूध नहीं, जहाँ दूघ पिया वहां लिया जन्म नहीं, दो दो माता ने खुशियां मनाई। ऐसे जन्मे कुअँर कन्हाई। कंस मामा का करने सफाया, रची कान्हा ने ऐसी माया, धन धन प्रभु की चतराई, शोभा बरणी न जाई । बाजत ढोल नगाड़ा घर घर, और बाजे शहनाई। जब जन्मे कुअँर कन्हाई। लेखिका का परिचय :-  श्रीमती मनोरमा जोशी का निवास मध्यप्रदेश के इंदौर में है। आपका साहित्यिक उपनाम ‘मनु’ है। आपकी जन्मतिथि १९ दिसम्बर १९५३ और जन्मस्थान नरसिंहगढ़ है। शिक्षा - स्नातकोत्तर और संगीत है। कार्यक्षेत्र - सामाजिक क्षेत्र-इन्दौर शहर ही है। लेखन विधा में कविता और लेख लिखती हैं। विभिन्न पत्...
कैसा  है, क्यूँ  है, क्या है?
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कैसा  है, क्यूँ  है, क्या है?

======================== रचयिता : मुनव्वर अली ताज कैसा  है, क्यूँ  है, क्या है? सवालों का हल नहीं ग़म को समझना    दोस्तों   इतना  सरल    नहीं ग़म  गैस  नहीं ,  ठोस  नहीं  और    तरल   नहीं ग़म की   परख   में कोई  अभी तक सफल नहीं जीवन   मिटा दें    ऐसे   कई     ज़ह्र    हैं   मगर ग़म   को  मिटा  सके  कोई   ऐसा  गरल    नहीं जो  दे   खुशी   हमेशा ,  हमें    ग़म  न  दे  कभी आदि  से  आज   तक   कोई   ऐसी  ग़ज़ल नहीं मैं  पी  चुका  हूँ   दर्द के सागर     को   इस लिए ग़म  के    दबाव    से   मेरी   आँखें सजल  नहीं ग़म  से   हरी भरी  हैं  ये   कागज़   की    खेतियाँ जल  है  ये  रोशनाई   का  ,  वर्षा   का जल  नहीं जो  'ताज'  है    उसी  पे  ही  उठती   हैं  उँगलियाँ कीचड़   बिना    खिले   कोई   ऐसा  कमल  नहीं   लेखक का परिचय :- मुनव्वर अली ताज उज्जैन आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि अ...
इश्क और अश्क
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इश्क और अश्क

============================= रचयिता :  दिलीप कुमार पोरवाल "दीप"  इश्क और अश्क न नाम लो अश्कों का , इश्क में अश्क तो बहते ही हैं l इश्क किया है इश्क करेंगे , इश्क में अश्क भी मोती से लगेंगे l इश्क में अश्क तो बहते ही है, अश्क भी गम और खुशी की कहानी कहते हैं l लोगों का क्या, लोग तो कुछ भी कहेंगे, वादा करो रो रो के अष्ट नहीं बहेंगे जब भी बहेंगे अश्क तुम्हारे, सोचना दिल मेरा रोया है l नाम न लो अश्कों का, इश्क में इश्क तो बहते ही हैं l इश्क का अश्क से रिश्ता है पुराना इसलिए मेरे अश्कों पर ना जानाl ना नाम लो अश्कों का, इश्क में अश्क तो बहते ही ll लेखक परिचय :- नाम :- दिलीप कुमार पोरवाल "दीप" पिता :- श्री रामचन्द्र पोरवाल माता :- श्रीमती कमला पोरवाल निवासी :- जावरा म.प्र. जन्म एवं जन्म स्थान :- ०१.०३.१९६२ जावरा शिक्षा :- एम कॉम व्यवसाय :- भारत संचार निगम लिमिटेड आप भी अपनी कविताएं, कहानि...
मतदाता की सांसद से अभिलाषा
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मतदाता की सांसद से अभिलाषा

====================================================== रचयिता :  दिलीप कुमार पोरवाल "दीप"  देखो जा रहे हो संसद की चौखट पर बस इतना याद रखना जाकर चौखट पर अपना शीश नवाना देखो जा रहे हो संसद की चौखट पर बस इतना याद रखना किसी के बहकावे में ना आना देना तून साथ सदैव सत्य का करना समर्थन हमेशा उचित का देखो जा रहे हो संसद की चौखट पर बस इतना याद रखना ना डरना ना घबराना रखना अपना पक्ष  हमेशा देखो जा रहे हो संसद की चौखट पर बस इतना याद रखना रखना ध्यान संसद की गरिमा का और रखना मान हमारा निभाकर अपना राजधर्म रखना राष्ट्रहित सर्वोपरि पूरे करना अपने किए वादे देखो जा रहे हो संसद की चौखट पर बस हमें भूल न जाना और हां जब हो जाए वहां अवकाश शीघ्र लौट आना जुड़े रहना जमीन से अपनों के बीच लेखक परिचय :- नाम :- दिलीप कुमार पोरवाल "दीप" पिता :- श्री रामचन्द्र पोरवाल माता :- श्रीमती कमला पोरवाल निवासी :- जावरा म.प्र. जन...
बरसों बाद  बरसी खुशियाँ
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बरसों बाद बरसी खुशियाँ

संजय वर्मा "दॄष्टि" मनावर जिला धार (मध्य प्रदेश) ******************** बरसों बाद  बरसी खुशियाँ कश्मीर के आँगन में केशर की क्यारियों में मधुप मधुर राग सुनाए कश्मीर के आँगन में ह्रदय में चुभते थे कभी भय के शूल वीरान पथ पे रोती थी बर्फीली वादियां कश्मीर के आँगन में सत्तर वर्षो से झांकते मासूम चेहरे सूनी पड़ी झीलों में कश्मीर के आँगन में अविरल बहते आँसू पलायन की गाथा सुनाते थे कभी कश्मीर के आँगन में नई इबारत लिखी सुनहरे सपने हुए साकार खिलखिलाने लगी दूब अब कश्मीर के आँगन में जन्नत महकी केशर सी स्वप्न हुए साकार कश्मीर के आँगन में संजय वर्मा "दृष्टि"   परिचय :- नाम :- संजय वर्मा "दॄष्टि" पिता :- श्री शांतीलालजी वर्मा जन्म तिथि :- २ - मई -१९६२ (उज्जैन ) शिक्षा :- आय टी आय व्यवसाय :- ड़ी एम (जल संसाधन विभाग ) प्रकाशन :- देश - विदेश की विभिन्न पत्र - ...
हिन्दुस्तान है महान
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हिन्दुस्तान है महान

=================================== रचयिता : शिवांकित तिवारी "शिवा" शांति का प्रतीक धर्मप्रिय सत्यशील ऐसा देश है हमारा हिन्दुस्तान, सभी मिलजुल के रहे,दिल की बात खुल के कहें, मन में तनिक भी नहीं अभिमान, जात और पात की ना करे कोई बात कद्र करते हम सबके जज्बात की, दुख और सुख में भी खड़े रहते साथ ना करते हम चिंता  दिन और रात की, वीरों के बलिदान का,इस धरा महान का,करते हम सभी मिल सम्मान है, भारत मां के लाल,हाथ में लिये मशाल,दुश्मनों की हर चाल को करते नाकाम है, देश का किसान,जो देश की है शान,उगा अन्न देश को देता जीवनदान है, सिंह सम दहाड़ भर, घाटियां पहाड़ चढ़,खड़ा सीना तान के जवान है, मंदिरों में गीता ज्ञान,मस्जिदों में है कुरान,दोनों धर्मों का अलग-अलग स्थान है, हिंदु मुस्लिमों में प्यार,सदा रहता बरकरार,सबका ईश्वर    सर्वत्र ही समान है, मां-बाप की तालीम,थोड़ी कड़वी जैसे नीम,पर सीख उनकी आ...
आजाद हो गये
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आजाद हो गये

=========================== रचयिता :  राम शर्मा "परिंदा" कई धर्म - जातियाँ कई वाद हो गये । हे ! चन्द्रशेखर, हम आजाद हो गये ।। कदर नहीं बलिदान की चिंता धन और मान की भीतर से सब काफिर है बातें कर रहे हैं शान की स्वतंत्रता के नाम पर बरबाद हो गये । हे ! चन्द्रशेखर, हम आजाद हो गये ‌‌।। भूल गये निज संस्कृति हर जगह हो रही अति कहने को है पढ़े-लिखे मति बन रही है कुमति मानव के  नाम पर  अपवाद हो गये । हे ! चन्द्रशेखर, हम आजाद हो गये ।। परिचय :- नाम - राम शर्मा "परिंदा" (रामेश्वर शर्मा) पिता स्व जगदीश शर्मा आपका मूल निवास ग्राम अछोदा पुनर्वास तहसील मनावर है। आपने एम काम बी एड किया है वर्तमान में आप शिक्षक हैं आपके तीन काव्य संग्रह १ परिंदा, २- उड़ान, ३- पाठशाला प्रकाशित हो चुके हैं और विभिन्न समाचार पत्रों में आपकी रचनाओं का प्रकाशन होता रहता है, दूरदर्शन पर काव्य पाठ के साथ-साथ आप मंचीय कव...
रक्षाबंधन ,स्वतंत्रता दिवस,कश्मीर विजय
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रक्षाबंधन ,स्वतंत्रता दिवस,कश्मीर विजय

============================ रचयिता : डॉ. बी.के. दीक्षित सज़ी कलाई राखी से, रह रह कर याद दिलाती है। बहनों का प्यार निराला है, आँख आज भर आती है। बहन बड़ी हो या छोटी, ज़ज्बे में सदा बडी होतीं। दुख कैसा भी घनघोर रहे, सन्मुख सदा खड़ी होतीं। रक्षाबंधन के अवसर पर ही क्यों याद करें केवल उनको। ये रिश्ता है अनमोल जगत में, बतलाना होगा जनजन को। है संयोग आज इस दिन का, संगम ख़ास पुनीत हुआ। पन्द्रह अगस्त, रक्षा बंधन, तीजा, कश्मीर स्वतंत्र हुआ। तीन तीन त्योहारों की,,,,,,,,, शान बहुत अलबेली है। नहीं कलाई है सूनी, ,,,,,,,,,,,बहन न कोई अकेली है। भारत माता की जय बोलो तब बस इतना आभास रहे। हो तुम्हें मुबारक़ पर्व तीन,,,,,,,,,हर्ष और सौगात रहे। भारत माँ के मुखमंडल पर,,,नहीं वेदना कोई भी है। बहुत दिनों के बाद आज माँ,शायद खुश होकर सोई है। हो नमन राष्ट्र के नायक को, और लौह पुरुष को नमन करो। जो आँख दिखाये शत्रु ...
सच में कहीं ये देशद्रोही तो नहीं हैं ?
कविता

सच में कहीं ये देशद्रोही तो नहीं हैं ?

============================ रचयिता : डॉ. बी.के. दीक्षित तरस बहुत आता है तुम पर,क्यों सोच आपकी ओछी है? धारा हटी तीन सौ सत्तर,क्यों फ़िर भी चाहत खोटी है? यू एन पर होता यकीन,पर देश प्रतिष्ठा नहीं सुहाती। कश्मीर मुक्त,होगा सशक्त सपने में बात नहीं नहीं भाती। सौ साल पुरानी एक पार्टी,निज कर्मों पर ना शर्माती। सिंहासन है अभिशिप्त ,कभी बेटा कभी मम्मी आती। लौह पुरुष से अमित लगें,मोदी की बात निराली है। देश आपके साथ हुआ,,,अब क़िस्मत खुलने वाली है। हम नहीं गुलामों में शामिल,हैं देश प्रेम के अभिलाषी। नहीं कभी स्वीकार हमें वो,हम हैं सच में भारत वासी। अफ़सोस हमें,क्यों है वज़ूद?जो देश द्रोह की बात करें? हम मोदी के दीवाने हैं,सदियों तक वो ही राज़ करें। कुछ पत्रकार हैं भृमित बहुत,,,,,,,,होता स्वभाव विद्रोही मन। केवल विरोध न कोई शोध,कलुषित है उनका तन मन धन। हम मोदी के अनुयायी हैं,,,देश प्रेम सर चढ़ बोले।...
रक्षाबंधन
कविता

रक्षाबंधन

======================= रचयिता : विनोद सिंह गुर्जर भाई के माथे पर चंदन। बहिना का प्यारा स्पंदन। करूणा का त्यौहार वंदन। रक्षाबंधन ...रक्षाबंधन।। दूर भले हम लेकिन बहिना, तू भाई का प्यारा गहना। तेरी खुशियां मेरी खुशियां, कलाई पर मैंने जो पहना।। नेह अजर और अमर रहेगा, धागा प्रेम अजब गठबंधन।।... रक्षाबंधन ...रक्षाबंधन।।.... परिचय :-   विनोद सिंह गुर्जर आर्मी महू में सेवारत होकर साहित्य सेवा में भी क्रिया शील हैं। आप अभा साहित्य परिषद मालवा प्रांत कार्यकारिणी सदस्य हैं एवं पत्र-पत्रिकाओं के अलावा इंदौर आकाशवाणी केन्द्र से कई बार प्रसारण, कवि सम्मेलन में भी सहभागिता रही है। आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि अपने परिचय एवं फोटो के साथ प्रकाशित करवा सकते हैं, अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि प्रकाशित करवाने हेतु हिंदी में टाईप करके हमें hindirakshak17@gmail.com पर मेल कीजिये...
श्रद्धांजलि
कविता, संस्मरण

श्रद्धांजलि

============================= रचयिता : डॉ. अर्चना राठौर "रचना" देकर श्रद्धाँजलि, दी सु-षमा को शमा धरती माँ है बहुत उदास, पर है आकाश भी उदास | खो दिया है आज उसको , देती थी जो सबको आस | भारत माँ का थी अभिमान, देश की थी आन और बान | सीता चरित्र ,नारी की शान, करते सब जिसका सम्मान | दहाड़ती जब  शेरनी  सी , हो सदन में खलबली सी | वो बोलतीं बेबाक थीं जब , सब देखते अवाक् थे  तब | ज्ञान की  भंडार थी  वो , संस्कृति का मान थी जो | वक्तव्य भिन्न भाषाओं में , करती विदेश जाती थीं तो है नभ रो रहा,धरा भी रो रही , बिटिया तो चिर निद्रा सो रही| अब तो नदियां सी हैं बह रहीं , यहाँ-वहाँ नयनों से हर कहीं | करते हम सलाम उनको , देकर सब सम्मान उनको | ह्रदय से सुमन अर्पित कर, हार्दिक श्रद्धाँजलि उनको | लेखिका परिचय :- नाम - डॉ. अर्चना राठौर "रचना" (अधिवक्ता) निवासी - झाबुआ, (म...
बाहर से हँसता हूँ
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बाहर से हँसता हूँ

========================= रचयिता : रामनारायण सोनी दो पल को जागा फिर बरसों तक सोया हूँ आशा के पंखो पर सपनों को ढोया हूँ साँसों ने मोहलत दी उतना भर जी पाया कतरा भर पानी था सागर में खो आया आँसू का मोल यहाँ बालू से सस्ता है झूँठों की बस्ती में साँच हुआ खस्ता है फूलों की सेज सजी नीचे बस शूल धरे सूनी इस अमराई में गिद्धों के शोर भरे दोहरे इस चेहरे से दर्पण भी हार गया जीवन के उपवन को पाला क्यूँ मार गया सुर तो सब मीठे है कँपते उन तारों के पिटते हैं ढोल सभी गीत सजे प्यारों के जीवन की धारा संग तिनके सा बहता हूँ भीतर सौ ज्वाल लिये बाहर से हँसता हूँ   परिचय :- नाम - रामनारायण सोनी निवासी :-  इन्दौर शिक्षा :-  बीई इलेकिट्रकल प्रकाशित पुस्तकें :- "जीवन संजीवनी" "पिंजर प्रेम प्रकासिया", जिन्दगी के कैनवास लेखन :- गद्य, पद्य सेवानिवृत अधिकारी म प्र विद्युत मण्डल आप भी अपनी कविताएं, कहानिया...
जीवन और बारिश भाग – 2
कविता

जीवन और बारिश भाग – 2

पवन मकवाना (हिंदी रक्षक) इंदौर मध्य प्रदेश ******************** आँखों पर हाथ रखे वह देख रहा था टकटकी लगाए आस है जिनके रुकने की बरसने से गति तगारी लिए मजदूर की जो कमर पर लपेटे मैली सी चादर भूख मिटाने के यंत्र की भांति सड़क किनारे खड़े अपनी काग़ज की फिरकियों के रूप में अपने सपनों को बारिश के पानी में गलता देख रहे अधनगें कपड़े पहने उस अधेड़ की ठेले पर आधे कच्चे आधे पके केले लिए बैठी मक्खियां उड़ाती उस बूढी नानी की जो पाल रही है अपनी मृत बच्ची के बच्चों को जिन्हे छोड़ गया उनका जल्लाद बाप जब वह बेच ना पाया बूढी नानी के विरोध के चलते अपनी मासूम बेटियों को किसी और जल्लाद के हाथ दारु से अपना गला तर करने आस है इन सबको की रुके बारिश तो शुरू हो काम उस ऊँचे भवन का जिसके भरोसे छोड़ आये हैं अपना गाँव कई मजदूर की बारिश रुके तो खुले उनके पेट पर बंधी वह चादर रुके बारिश तो रुके गलना फिरकियों का आएं बच्चे ग्राहक ...
क्या है किताब ?
कविता

क्या है किताब ?

====================== रचयिता : मनीषा व्यास ज्ञान का भंडार समाज का आइना भटकन की राह मुसाफ़िर का सहारा अकेलेपन का साथी अंधेरे में उजाला सूचनाओं का भंडार निराशा में आशा अनुभव का निचोड़ शब्दों का शृंगार भावनाओं की अभिव्यक्ति विधि का विधान विजय का तिलक कर्म का कुरुक्षेत्र सपनों की उड़ान अपने में समेटे ये है किताब का सृजित परिधान लेखिका परिचय :-  नाम :- मनीषा व्यास (लेखिका संघ) शिक्षा :- एम. फ़िल. (हिन्दी), एम. ए. (हिंदी), विशारद (कंठ संगीत) रुचि :- कविता, लेख, लघुकथा लेखन, पंजाबी पत्रिका सृजन का अनुवाद, रस-रहस्य, बिम्ब (शोध पत्र), मालवा के लघु कथाकारो पर शोध कार्य, कविता, ऐंकर, लेख, लघुकथा, लेखन आदि का पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशन एवं विधालय पत्रिकाओं की सम्पादकीय और संशोधन कार्य  आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि अपने परिचय एवं फोटो के साथ प्रकाशित करवा सकते हैं, अपनी कविताएं, कहानि...
स्वतंत्र राहों में
कविता

स्वतंत्र राहों में

============================= रचयिता : स्वतंत्र शुक्ला तुम्हारे जिस्म जब-जब, धूप में काले पड़े होंगे।। हमारी लेखनी के, पाँव में छाले पड़े होंगे।। अगर आंखों में, गहरी नींद के ताले पड़े होंगे।। तो कुछ ख्वाबों को, अपनी जान के लाले पड़े होंगे।।        "जिनकी साज़िशों से, अब हमारी जेब खाली है।।" वो अपने हांथ जेब में, कहीं डाले पड़े होंगे।। हमारी उम्र मकड़ी है, हमें इतना बताने को।। बदन पर झुर्रियों की, शक्ल में जाले पड़े होंगे।। क्यूं पहुंच न पाई नज़रें..? मायूस चेहरों तक।। "स्वतंत्र" राहों में उनके, केश घुघराले पड़े होंगे।। लेखक परिचय :- नाम :- स्वतंत्र शुक्ला आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि अपने परिचय एवं फोटो के साथ प्रकाशित करवा सकते हैं, अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि प्रकाशित करवाने हेतु हिंदी में टाईप करके हमें hindirakshak17@gmail.com पर मेल कीजिये मेल करने के बाद हम...
हट गई धारा तीन सौ सत्तर
कविता

हट गई धारा तीन सौ सत्तर

============================= रचयिता : आशीष तिवारी "निर्मल" कश्मीरी वादी को नही किसी की बुरी नजर लगेगी ना ही अब खून से लथपथ वर्दी कोई सनी मिलेगी। किताब ही होगी हाथों पर अब ना कोई पत्थर होगा, केसर वाली क्यारी में अब ना कोई नस्तर होगा। अजानों संग भजनों की अब सुखद आशनाई होगी कौमी एकता की बजती सुरीली शहनाई होगी। हिन्दू मुस्लिम में अब ना कोई नफरत का मंजर होगा फूल ही बरसेंगे वादी से ना किसी हाथ में खंजर होगा। आतंकी मंसूबे, देश विरोधी नारे अब नहीं सुनाई देंगे कश्मीरी पंडित बेचारे ना अब लाचार दिखाई देंगे। हट गई धारा तीन सौ सत्तर सिंहों ने ताकत दिखलाई है कश्मीर हमारा था, है, और रहेगा भी गाथा दोहराई है। लेखक परिचय :- नाम :- आशीष तिवारी निर्मल रीवा (मध्यप्रदेश) आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि अपने परिचय एवं फोटो के साथ प्रकाशित करवा सकते हैं, अपनी कविताएं, कहानि...
जय, जय माँ भारती
कविता

जय, जय माँ भारती

========================== रचयिता : भारत भूषण पाठक विधा-तेवरी जय, जय माँ भारती।   सिंह-सुता दहाड़ती।।  आगे कभी, पीछे कभी   नीचे कभी, ऊपर कभी   घूम-घूम अग्नि बाण मारती   जय, जय माँ भारती ।   सिंह-सुता दहाड़ती।।  मार्ग दुष्कर था,लक्ष्य अटल था।  पर निश्चय उसका भी, प्रबल था।।   बढ़ रहे थे , असंख्य दुशासन।    चीर डालने को, तेरा दामन।।     जय, जय माँ भारती ।     सिंह -सुता दहाड़ती।।     मानो खड़ी हो साक्षात माँ चण्डी।    ़धर जोर वो जब थी हूँकारती ।।       जय, जय माँ भारती ।     सिंह -सुता दहाड़ती।।  असंख्य तोप थे गरज रहे।  नरमुण्ड भी थे बिखर रहे।।    जय,जय माँ भारती।  सिंह -सुता दहाड़ती।। होकर खून से लथपथ।   माँ तेरी चरणों को   वो थी पखार रही।  और दुशासनों पर अपने अन्त तक थी वो हूँकार रही।। जय, जय माँ भारती। सिंह-सुता दहाड़ती।। लेखक परिचय :-  नाम - भारत भूषण पाठक लेखनी नाम - तुच्छ कवि '...
सरहद
कविता

सरहद

======================== रचयिता : वन्दना पुणतांबेकर सरहदों पर खड़ी, यह बर्फ की दीवार। देश का समर्पित,शहीदों का परिवार। हर क्षण-क्षण के पहरेदार यह हैं। सहते गिरते तुफानो के वार यह है । चट्टानों से अटल खड़े हैं। सैनिक सीना तान खड़े हैं। प्रेम,संवेदनाओं का समर्पण कर,चारो प्रहर डटे खड़े हैं। वतन की रक्षा की खातिर सीने पर कई वार सहे हैं। मुश्किलों को पार कर। देश की ये आन बने है। शीतल लहरों की मार यह सहते। हमको चैन की नींद ये देते। फिर भी आँखे खोल खड़े हैं। सजगता की मिसाल बने हैं। भारत का गौरव,अभिमान रहे है। सम्मान करो मातृभूमि के इन लालो का। शूरवीर जो माँ ऐ है,इनकी। सच्ची देशभक्ति का पुंज बनी है। नमन देश के उन परिवारों को। देश की खातिर बेटो की कुर्बानी देकर। चेहरे पर मुस्कान लिए है।   परिचय :- नाम : वन्दना पुणतांबेकर जन्म तिथि : ५.९.१९७० लेखन विधा : लघुकथा, कहानियां, कविताएं, हायकू कविताएं,...
नीर
कविता

नीर

============================== रचयिता : रीतु देवी जब से तुझसे जुदा हुयी, पानी की तरह अनवरत आँसू बहती रही। लाख कोशिशों बाबजूद न छुपा पाती, बूंद इसके मोती बनकर सबके समक्ष बिखर जाती, हाल ऐ दिल बहुत नाजुक है साजन, काजल भी बह जाए इन नयनों से पानी बनकर साजन। लगता है जैसे समंदर बना है मेरे नयनों में तेरी याद में लहरें उठती रहती हैं सपनों में क्या करूँ कुछ समझ न पाऊँ? हाल ऐ दिल मैं किसे सुनाऊँ।   लेखीका परिचय :-  नाम - रीतु देवी (शिक्षिका) मध्य विद्यालय करजापट्टी, केवटी दरभंगा, बिहार आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि अपने परिचय एवं फोटो के साथ प्रकाशित करवा सकते हैं, अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि प्रकाशित करवाने हेतु हिंदी में टाईप करके हमें hindirakshak17@gmail.com पर मेल कीजिये मेल करने के बाद हमे हमारे नंबर ९८२७३ ६०३६० पर सूचित अवश्य करें … और अपनी कविताएं, लेख पढ़ें अपने मोब...
शहीद तुम्हें नमन्
कविता

शहीद तुम्हें नमन्

============================== रचयिता : अर्चना मंडलोई अन्धेरा उस घर में हो गया हाथ बढा कर एक दिया रख देना तुम।। निगल गया उसे मौत का कोई सौदागर हो सके तो, बेटी के सर पर हाथ जरा रख देना तुम अन्धेरा उस घर में हो गया एक दिया रख देना तुम मेरा घर रौशन हो जाए जला डाला उसने अपना घर आँखे उसकी तकती रही ताबुत हो गया उसका तन हो संभव तो, हाथ बढाकर चुडी हाथो में उसके पहना देना तुम अन्धेरा उस घर में हो गया एक दिया रख देना तुम।। मेरे घर में दीवाली हो हो जाए बैसाखी और ईद इसलिए हो गया वो शहीद हो सके तो बढकर उसे नमन् कर लेना तुम अन्धेरा उस घर में हो गया एक दिया उसके भी घर रख देना तुम। नन्हें हाथों ने जब पकडी होगी चीता की लौ काँप गई होगी उसकी रूह आशीषों का हाथ जरा तुम उसके सर पर रख देना अन्धेरा उस घर में हो गया एक दिया रख देना तुम।। काँपते हाथो ने जब छुआ होगा धूँधली नजरो ने माथे को जब चूमा होगा तिरंगे म...
कान्हा
कविता

कान्हा

====================================== रचयिता : मित्रा शर्मा कान्हा ! जब तुम पूछते हो  जब तुम देखते हो  चाहत भरी आँखों से तुम्हारे भाव  दिख जाते है।  कान्हा ! जब तुम मुरली बजाते हो  ऐसे सुबिरस मिलती है   कानों और हृदय को  सुध ही खो जाते है। कान्हा !  तुम्हारी प्रेम में अतीन्द्रिय झूले में  हम खो जाते है तुम्हारी भावनाओं में । परिचय :- मित्रा शर्मा - महू (मूल निवासी नेपाल) आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि अपने परिचय एवं फोटो के साथ प्रकाशित करवा सकते हैं, अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि प्रकाशित करवाने हेतु हिंदी में टाईप करके हमें hindirakshak17@gmail.com पर मेल कीजिये मेल करने के बाद हमे हमारे नंबर ९८२७३ ६०३६० पर सूचित अवश्य करें … और अपनी कविताएं, लेख पढ़ें अपने मोबाइल पर या गूगल पर www.hindirakshak.com खोजें...🙏🏻 आपको यह रचना अच्छी लगे तो साझा जरुर कीजिये और पढते रहे...
कहावतों की कविता – 3
कविता

कहावतों की कविता – 3

=============================== रचयिता : विनोद वर्मा "आज़ाद" स्वर-"आ" को लेकर बनाई गई कविता ... आप न जोगी गीदड़ी कागे न्यौतन जाय, आस पराई जो तके जीवत ही मर जाय, आगे पग से पत बढ़े पाछे से पत जाय, आम फले नीचो नमे एरंड ऊंचो जाय। 0000 आभा चमके बीजली गधे मरोड़े कान, आई बहूँ आयो काम गई बहूँ गयो काम, आप करे सो काम पल्ले हो सो दाम, आम के आम गुठलियों के दाम, 0000 आओ रे पत्थर पड़ मेरे पांव, आदर न भाव झूठे माल खाव। कहावतों के अर्थ-- * गीदड़ी स्वयम तो जोगन (योगिनी) है नहीं, कौवे को जोगी (योगी) बनने के लिए आमंत्रित करे अर्थात जो काम स्वयम करना न जानता हो वही कार्य दूसरों को करने के लिए प्रेरित करे। * जो दूसरों पर निर्भर रहते है उनको तो जन्म लेते ही मर जाना चाहिए--अर्थात दूसरों पर निर्भर रहने वाला कभी सुखी नही रह सकता-सफल नही हो सकता। * आगे बढ़ने से आबरू बढ़े और पीछे लौटने से आबरू घटे-अर्थात जहां ...
मित्र वही है
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मित्र वही है

============================= रचयिता : श्रीमती मीना गोदरे 'अवनि' दर्द ह्रदय का जो बहला दे मित्र वही है राह कंटीली  सुगम बना दे मित्र वही है टूटे मन में उम्मीद जगा दे मित्र वही है बिना भेद के जो अपना ले मित्र वही है मरहम बन नासूर मिटा दे मित्र वही है खुशियां गम मेरे अपना ले मित्र वही है विश्वासों केसंग  जो न खेले मित्र वही है  विकट घडी़ मेंसंग खड़ा हो मित्र वहीहै प्रेम की ज्योति सदा जलाए मित्र वही है दिल का राजदार बन जाए मित्र वही है जीत हार में सदा संग हो मित्र वही है समझे जो हर बात मित्र की मित्र वही है न हो ईर्षा द्वेष न हो मलाल मित्र वही है रखें इस रिश्तै का सम्मान मित्र वही है लेखिका परिचय :- नाम - श्रीमती मीना गोदरे 'अवनि' शिक्षा - एम.ए.अर्थशास्त्र, डिप्लोमा इन संस्कृत, एन सी सी कैडेट कोर सागर हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय दार्शनिक शिक्षा - जैन दर्शन के प्रथम से चतुर्थ भाग साम...
बारिश और जीवन – भाग १
कविता

बारिश और जीवन – भाग १

पवन मकवाना (हिंदी रक्षक) इंदौर मध्य प्रदेश ******************** आँखों पर हाथ रखे वह देख रहा था टकटकी लगाए बादल को आस है जिनके बरसने की आस बंधी है जिनसे मंगलू की धापू की खेत में खड़े बबूल की दाल पर बैठी चिड़िया की खेत की मेढ़ के किनारे बिल में बैठे मूषक मेंढक की और वहीँ मारे कुण्डली बैठे काले नाग की कि बादल गरजेगें पानी बरसेगा हल चलेगें बीज डलेगें छाएगी हरियाली होगी हर और खुशहाली हरे-भरे खेत देख हर्षायेगा मन की अब होगें सारे दुःख दूर हो दीवाना मजदूर गायेगा दूर नहीं अब वो दिन जब धापू-मंगलू का बस्ता कॉपी किताब गणवेश स्कुल की और जूते आयेगें दूर नहीं दिन जब बच्चे नई पोषाख पहन इतरायेगें कमला-विमला सखियों संग गायेगी गीत बादलों की तारीफ़ में की तुम ना होते तो क्या होता हमारा ...? बबूल की डाल बैठी चिड़िया दोहराएगी गाना की उसे और उसके बच्चों को भरपेट मिलेगा खाना खेतों में दौड़ते फिरेगें मूषक चुगने को द...