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पद्य

जिंदगी की डगर
कविता

जिंदगी की डगर

प्रभात कुमार "प्रभात" हापुड़ (उत्तर प्रदेश) ******************** जिंदगी की हर डगर तू रख हर कदम फूँक-फूँक कर। नहीं आसान जिंदगी की कोई डगर मिलेंगी चुनौतियाँ कदम-कदम, करना है तुझे संघर्ष जिंदगी की हर डगर । कभी होगी छोटी डगर तो कभी काटे न कटने वाली बड़ी लंबी नीरस सी होगी जिंदगी की डगर। राह ऐसी है कौन सी जहाँ न हों शूल और पत्थर जब-तक नहीं दर्द का अनुभव कड़वी है सुकून की हर डगर। तू तनिक भी न डर साथ तेरा साया भी न दे अगर हौंसले अपने बुलंद रख तू राह में अकेला ही चल पीना भी पड़े पानी खुद कुआँ खोदकर। तू चले जा अकेला ही निरंतर, न रुक कभी जिंदगी के पथरीले पड़ावों पर भी मंजिल मिल नहीं जाती जब तक तू चले जा फिर से जिंदगी में नई डगर बनाकर। कहते हैं मन के हारे हार है तो फिर मन के जीते जीत भी लेकर दृढ़ संकल्प हो निडर तू सबके मन को जीत जीवन लक्ष्य अंगीकृत कर हर पल होकर सजग अपने...
मित्रता
कविता

मित्रता

रुचिता नीमा इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** एक शब्द है जाना पहचाना सा... दिल के क़रीब कोई अपना सा... जिससे नहीं हो कोई भी सम्बन्ध... पर हो दिल के गहरे बंधन।। जो बिन कहे सब समझ जाएं जिसे देख दर्द भी सिमट जाए... जहाँ उम्र भी ठहर जाए... जिसे देखकर ही आ जाये सुकून और सब तनाव हो जाये गुम... तो वह है मित्र ... जब मुश्किलों से हो रहा हो सामना... और लगे कि अब किसी को है थामना तब जो हाथ बढ़ाये... वह है मित्र... निःस्वार्थ, निश्छल, और सब सीमाओं से परे जैसे हो कृष्ण और सुदामा, जहाँ बाकी न रह जाये कोई आशा... बस यही है मित्रता की परिभाषा परिचय :-  रुचिता नीमा जन्म २ जुलाई १९८२ आप एक कुशल ग्रहणी हैं, कविता लेखन व सोशल वर्क में आपकी गहरी रूचि है आपने जूलॉजी में एम.एस.सी., मइक्रोबॉयोलॉजी में बी.एस.सी. व इग्नू से बी.एड. किया है आप इंदौर निवासी हैं। घोषणा पत्र : मैं यह...
हरियाली तीज
दोहा

हरियाली तीज

कीर्ति मेहता "कोमल" इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** सावन की शुभ तीज है, आनंद अति उमंग। गौरी पूजे नारियाँ, मन उल्लास उतंग।। सावन के झूले पड़े, झूले सुंदर नार। सजी-धजी सखियाँ हँसे, ऊँची पींगें मार।। मालपुए मीठे करें, मुँह में मधुर मिठास। घर-घर सावन तीज का, पर्व मनाएं खास।। शंकर-गौरी पूजती, सभी सुहागन नार। सुख सौभाग्य सँवारती, माँगे शुभ संसार।। हरियाली चहुँ ओर है, हुआ हरित संसार। पावस की बूंदें करें, सकल धरा श्रृंगार।। बरखा बरसे झूमके, व्योम धरा सन्देश। इंद्रधनुष के रंग सजे, निखरे नभ का वेश।। परिचय :- कीर्ति मेहता "कोमल" निवासी : इंदौर (मध्य प्रदेश) शिक्षा : बीए संस्कृत, एम ए हिंदी साहित्य लेखन विधा : गद्य और पद्य की सभी विधाओं में समान रूप से लेखन रचना प्रकाशन : साहित्यिक पत्रिकाओं में, कविता, कहानी, लघुकथा, गीत, ग़ज़ल आदि का प्रकाशन, आकाशवाणी...
श्वेता छंद
छंद

श्वेता छंद

मीना भट्ट "सिद्धार्थ" जबलपुर (मध्य प्रदेश) ******************** विधानः वार्णिक छंद दस वर्ण गण संयोजन : मगण रगण मगण गुरु २२२ २१२ २२२ २ चार चरण, दो-दो चरण समतुकांत अंबा दुर्गा भवानी कामाक्षी। कुष्मांडा शारदा माता साक्षी।। जो जन्मान्तरों को है जोड़े। पाखंडी दंड दे माया तोड़े।। माता पूजा करें आ स्वीकारो। द्वारे तेरे खड़े हैं माँ तारो।। श्रद्धा से माँ बुलाते आ रानी। पूरी हो प्रार्थना मेरी दानी।। त्राता सौगात दें हैं कल्याणी। देती हैं शक्ति दें मीठी वाणी।। पीड़ा सारी हरें माता जानो। अन्तर्यामी भरें झोली मानो।। परिचय :- मीना भट्ट "सिद्धार्थ" निवासी : जबलपुर (मध्य प्रदेश) पति : पुरुषोत्तम भट्ट माता : स्व. सुमित्रा पाठक पिता : स्व. हरि मोहन पाठक पुत्र : सौरभ भट्ट पुत्र वधू : डॉ. प्रीति भट्ट पौत्री : निहिरा, नैनिका सम्प्रति : सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश ...
जीवन एक संघर्ष है
कविता

जीवन एक संघर्ष है

संजय जैन मुंबई (महाराष्ट्र) ******************** सुनता हूँ आज मैं मानव जीवन की सच्चाई। न जीवन में हुआ कभी गमो का अंत। न खुशियों में आई कभी भी कोई कमी। गुजरा है मेरा जीवन खुशियों और गमों से।। इसी तरह से जीवन बना रहा संघर्षमय। हकीकत जीवन की में सदा समझता रहा। कदम कदम पर मिली मुझे प्रभुजी की कृपा। इसलिए सफलता की मैं सीढ़ी चढ़ता गया।। जब भी याद आते है मुझे वो पुराने दिन। तो आँसू गिरने लगते है मेरे इन आँखो से। और खो जाता हूँ माँफ पुराने मित्रों के ख्यालों में। जो मेरे सुख दुख में सदा ही साथ देते थे।। लगन और मेहनत के द्वारा इंसान बनता है महान। तभी तो छु पाता है जीवन की ऊँचाइयों को। अकेला चलकर भी वो नया निर्माण करता है। और अपने हौसलों को भी सदा ही जिंदा रखता है।। परिचय :- बीना (मध्यप्रदेश) के निवासी संजय जैन वर्तमान में मुम्बई में कार्यरत ह...
तिरंगा है लहराया
कविता

तिरंगा है लहराया

संध्या शुक्ला अमेठी (उत्तर प्रदेश) ******************** हर जगह पर तिरंगा है लहराया देखो आज़ादी का दिन है आया विश्वासघात कर अंग्रेजो ने भारत को गुलाम बनाया था सोने की चिड़िया को कातिलों ने अपना शिकार बनाया था छीन कर सत्ता राजाओं की अपना राज सिंहासन लगाया था भारत की भोली जनता को अंग्रेजो ने आपस मे लड़वाया था बहाकर नदियां खून की मातम में उत्सव मनाया था भाई भाई को बांटकर अंग्रेजो ने भारत माँ को तड़पाया था हर जगह पर तिरंगा है लहराया देखो आजादी का दिन है आया याद करो सब उन दिनों को जब भारत देश का हाल बुरा था वीर सपूतों की आंखों में आज़ादी का स्वप्न अधूरा था बरसते थे बदन पर कोड़े आंखों से लहू टपकता था रोते बिलखते बच्चो का भूख प्यास से दम निकलता था टूट चुकी थी सब उम्मीदे जब घना अंधेरा छाया था भारत की धरती पर कोई काला बादल मंडराया था खूंखारपन देख अंग्रेजो...
फिर भी गोरी प्यासी है
कविता

फिर भी गोरी प्यासी है

अंजनी कुमार चतुर्वेदी निवाड़ी (मध्य प्रदेश) ******************** जाय बसे परदेश सजनवाँ, मन में भरी उदासी है। बाहर बरस रहा है पानी, फिर भी गोरी प्यासी है। बारिश के पानी में भीगा, घर का चप्पा-चप्पा। बैठ झरोखा रिमझिम देखे, लगे सजन का धप्पा। धरती आँगन भीग गए सब, फिर भी मन है सूखा। भीग गए गलियारे उपवन, अंतर्मन है भूखा। बिना तुम्हारे सावन आया, मन में कोई हुलास नहीं। सखियाँ सब साजन सँग झूलें, मेरे मन में आस नहीं। ओ बेदर्दी बालम तुमको, याद नहीं आती है। प्यार भरी ऋतु में भी निंदिया, पास नहीं आती है। रिमझिम बारिश आग लगाती, बढ़ती मन की प्यास है। हो सामीप्य सजन जब तेरा, दिल में बड़े उजास है। विरह वेदना से पीड़ित मन, और अधिक अकुलाता। डूब प्यार में जब अनंग ही, कामुक बाण चलाता। मोर पपीहा नहीं सुहाते, कोयल विरह बढ़ाती। है चकोर सी विरह वेदना, ऊँचे शिखर चढ़ाती...
पान मद्रास
कविता

पान मद्रास

डॉ. जयलक्ष्मी विनायक भोपाल (मध्य प्रदेश) ******************** तड़के, सूर्योदय से पहले गर्मी में, जब हम मकान की छत पर सोते रहते थे चैन से, सर्दी में, जब ठिठुरते थे, रजाई के भीतर तब सहसा एक आवाज उस नीरव निस्तब्धता में गूंजती थी, पान मद्रास, पान मद्रास! परीक्षा की तैयारियों में जुटे जब कभी साड़े पांच के अर्लाम से उठे तो वहीं आवाज चौंका देती हमें पान मद्रास, पान मद्रास! मंदिर की घंटियों की तरह मस्जिद की अज़ान के समान रोज, प्रतिदिन, हमेशा वो आवाज़ पान मद्रास, पान मद्रास! इतनी सुबह क्या कोई पान खरीदता होगा? साईकिल से गुजरने वाला शख्स आखिर कैसा होगा? रोजमर्रा की दिनचर्या का जरुरी हिस्सा अतीत से भविष्य को चीरती वह सशक्त, बुलंद, अविस्मृत सी आवाज, पान मद्रास, पान मद्रास! परिचय :-   भोपाल (मध्य प्रदेश) निवासी डॉ. जयलक्ष्मी विनायक एक कवयित्री, गायिका और लेखिका ह...
बन्धन धागों का
कविता

बन्धन धागों का

सरला मेहता इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** श्रावण शुक्ल पूर्णिमा को प्रतिवर्ष आता यह त्योहार बहन चाहे दूर हो या पास सज जाते उसके रक्षासूत्र उसके भाई की कलाई पर रोली अक्षत से विजय तिलक जीत का शुभ संदेश देता है कड़वाहट, मिठाई में घुलके सब उलाहनों को बहा देती है व गाँठ नेह की बंध जाती है कहने को ये हैं मात्र धागे रेशम के, सूत या जूट के किन्तु हैं बड़े अनमोल ये पल में बाँध देते पोटली में सारे शिकवे शिकायतें भी नेह की सुई के साथ मिल कर देते हैं रफ़ू या तुरपाई सुना है दादी नानी से सदा फ़टे हुए को सिल करके रूठों को भी मना लेते हैं ये रक्षा सूत्र भी एक धागा है राखी के पावन पर्व पर इसे बाँधा जाता है कलाई पर भाई बहन के प्रेम के प्रतीक संबल बन जाता संकटों में करे एक्यूप्रेशर का काम भी परस्पर नेह के प्रतीक धागे पिरो देते हैं रिश्ते नातों को रंगबिरं...
राखी की छटा
कविता

राखी की छटा

संजय कुमार नेमा भोपाल (मध्य प्रदेश) ******************** भाई बहन का परस्पर विश्वास, राखी का त्यौहार आया।। शब्दों का नहीं पवित्र बंधन का त्यौहार लाया। बचपन की याद, मिठाई की मिठास दिलाती है राखियां।। सावन का त्यौहार बहनों का खास दिन, लाए ये राखियां। अटूट प्रेम का भाव है राखियां।। भाई की कलाई की शान है यह राखियां। राखी के त्यौहार संग बहनों का साथ।। बहनों की रक्षा का वचन दे भाई का हाथ। अब बहना क्यों ना इतराए राखी के साथ।। सज संवर कर बहने अब मायके आई। घर की खुशियां बहनों की राखी संग आई।। मीठे पकवानों की सुगंध भैया के मन को भाई। खुशियां उमंगों संग भाई की कलाई को सजाती है राखियां।। भाई बहन का बंधन प्यार एवं विश्वास को बढ़ाती है ये राखियां। माथे पर तिलक लगाकर भाई के गौरव को बढ़ाती यह राखियां।। राखी की छटा देखते मांभी झूमे संग संग। परिचय :- संजय कुमार नेमा निवासी :...
बेटी का दर्द
कविता

बेटी का दर्द

अनिता चवदहिया बाड़मेर (राजस्थान) ******************** जो प्यार मिला माँ तुमसे ... वो प्यार अब मिल पाएगा क्या ।। हर जिद्द मानी जाती थी माँ, वो जिद्द अब मानी जाएगी क्या...! हर ख्वाइशे पूरी की जाती थी माँ, वो ख्वाइशे अब पूरी की जाएगी क्या...! मुझे बहू बनने का शोक नही माँ, वह अब एक बेटी बना पाएगें क्या..! नही कहती उनसे चांद-तारे तोड़कर लाओ, अब थोड़ा-सा प्यार दिला पाएगें क्या...! मेरी हर गलती को टाला जाता था माँ, अब गलती वो टाल पाएगें क्या...!! हर बात तुम समझाती थी माँ , अब बात वो समझा पाएगें क्या ...! जो काम तुम सिखाया करती थी माँ, अब काम वो सिखा पाएगें क्या..!! तुम अपनी समझा करती थी माँ, वो अपनी बना पाएगें क्या...!! जो प्यार मिला माँ तुमसे, वो प्यार अब मिल पाएगा क्या..? परिचय - अनिता चवदहिया पिता : खेमाराम माता : पेम्पो देवी पति : पारस चवदहिया जन...
कौमी एकता
कविता

कौमी एकता

सोनल सिंह "सोनू" कोलिहापुरी दुर्ग (छतीसगढ़) ******************** ईश्वर की सुंदरतम कृति है मानव क्या मानव मेंशेष रहा है मानव? जाति-पाति मजहब में बंटा है मानव मजहब की बात पर डटा है मानव। जाने किसने ये कौमें बनाई चहुँ ओर वैमनस्यता फैलाई। मानव को मानव से लड़ाया देश को दावानल सा दहकाया। अधिकाधिक पाने की चाहत मानव को दानव सा बनाया। मजहब के नाम पर बहलाया फूट पड़ी तो तीसरे ने लाभ उठाया। कौमी एकता तो बनी जुमलेबाजी है आज कौन इसमें राजी है ? सभी तैयार खड़े पलटने को बाजी है आपस में ये कैसी नाराजी है? कौमी एकता तो दिवा स्वप्न सी लगती है। वास्तव में हर किसी को ये चुभती है। भाई को यहाँ चारा बनाते देर नहीं लगती। मानवता यहाँ दूर खड़ी तड़पती है। काश कोई ऐसी पाठशाला हो जो इंसान को इंसान बनाये। इंसानियत का पाठ पढ़ाये जाति धर्म के बंधन तोड़ जाये। सम्पूर्ण मानव जाति एक हो सबके ...
सुनो बेटियों
कविता

सुनो बेटियों

रमाकान्त चौधरी लखीमपुर खीरी (उत्तर प्रदेश) ******************** सुनो बेटियों ! स्वाभिमान हित अब हथियार उठाना होगा। बने दुशासन घूम रहे जो, उनको सबक सिखाना होगा। आखिर कब तक जुर्म सहोगी, कब तक मुँह न खोलोगी। इन बहशी हत्यारों पर, कब तुम दंगा बोलोगी। भरी सभा में चीर खिंच गया, तब भी तुम खामोश रही। धोखा दे फिर छली गई, तब भी तुम बेहोश रही। बहुत बन लिया द्रोपदी अहिल्या, अब फूलन बन जाना होगा। सुनो बेटियों ! स्वाभिमान हित अब हथियार उठाना होगा। तुमसे ही जो जन्मा वह तुम पर अधिकार जमाता है। और तुम्हारे चुप रहने से वह पौरूष दिखलाता है। कभी जलाता चौराहों पर कभी कोख में मार रहा। कभी लूटता वही तुम्हे, जिससे तुमको प्यार रहा। इस बिगड़ी हुई ब्यवस्था को फिर सिस्टम पर लाना होगा। सुनो बेटियों ! स्वाभिमान हित अब हथियार उठाना होगा। मत कोई उम्मीद लगाना, बिके हुए अखबारों से।...
आजादी का अमृत महोत्सव
कविता

आजादी का अमृत महोत्सव

धर्मेन्द्र कुमार श्रवण साहू बालोद (छत्तीसगढ़) ******************** घर-घर तिरंगा, हर-घर तिरंगा। फहर-फहर फहराएं तिरंगा।। तीन रंगों से निर्मित तिरंगा। आन-बान-शान है इनके अंगा।। सबसे ऊपर केसरिया कहलाएं, शौर्य ,ताकत ,साहस दिखलाएं। शांति और सत्य सफेद बतलाएं, खुशहाली जीवन हरा परखाएं।। बहाओ प्यारे विचारों की गंगा ... लहर-लहर लहराएं तिरंगा ... कुंठित विचार और त्यागो द्वेष, ना रखें ईर्ष्या ना किसी से क्लेश। सत्य व अहिंसा का पहनो भेष, विश्व गुरु कहलाएं भारत देश।। मन में उठे सद् विचार तरंगा ... डगर-डगर लहराएं तिरंगा ... युवा शक्ति अब जाग जाओ, जात-पात का फंदा मिटाओ। मानवता का संदेश बिखराओ, नई-किरणें की उम्मीद जगाओ। अमृत उत्सव का यही उमंगा ... शहर-शहर फहराएं तिरंगा ... आओ प्यारे अब देश सॅंवारें, सादा जीवन उच्च विचारे। देश-प्रेम सारे जग में पसारें, माॅं भ...
आओ हम उन वीरों को याद करें
कविता

आओ हम उन वीरों को याद करें

महेन्द्र साहू "खलारीवाला" गुण्डरदेही बालोद (छत्तीसगढ़) ******************** स्वतंत्रता दिवस की स्वर्णिम बेला में आओ हम उन वीरों को याद करें। जिनके कुर्बानी के फलस्वरूप, आज हम दासता की बेड़ियों से मुक्त हुए।। भारत माता की आन-बान खातिर सितमगर फिरंगियों की यातनाएँ अरु अनगिन कष्ट जो सह गए आओ हम उन वीरों को याद करे।। शीश माँ भारती का झुकने न पाए जन्मभूमि के सम्मान में वीर,जो शीश कटाने प्रतिपल कटिबद्ध रहे आओ हम उन वीरों को याद करें।। वह वीर जो हँसते-हँसते, कनपटी अपने दाग गए गोली हँसकर फाँसी पर झूल गए "मेरा रंग दे बसंती" की टोली आओ हम उन वीरों को याद करें।। जंगे आजादी में वे कह चले "सरफरोशी की तमन्ना"... ऐसे माँ भारती के वीर सपूत, उन वीरों को हम याद करें।। मातृभमि की रक्षा करने, वीरांगना झाँसी की रानी पृष्ठभाग नवजात लिए, अंग्रेजों से लोहा लेने ठानी...
स्वतंत्रता
कविता

स्वतंत्रता

राजीव डोगरा "विमल" कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश) ******************** स्वतंत्र देश के परतंत्र नागरिकों जागो अपने अधिकारों के प्रति ही नहीं अपने कर्तव्यों के प्रति भी। स्वतंत्र देश के परतंत्र नागरिकों जागो अपने धर्म की रक्षा के लिए ही नहीं दूसरे धर्मों के मान-सम्मान के लिए भी। स्वतंत्र देश के परतंत्र नागरिकों जागो अपनी बहू बेटियों की रक्षा के लिए ही नहीं दूसरों की बहू बेटियों की सुरक्षा के लिए भी। स्वतंत्र देश के परतंत्र नागरिकों जागो अपनी स्वयं की स्वतंत्रता के लिए ही नहीं अपनी दबी कुचली परतंत्र सोच की स्वतंत्रता के लिए भी। परिचय :- राजीव डोगरा "विमल" निवासी - कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश) सम्प्रति - भाषा अध्यापक गवर्नमेंट हाई स्कूल, ठाकुरद्वारा घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है। ...
आया रे आया रक्षाबंधन आया
कविता

आया रे आया रक्षाबंधन आया

रूपेश कुमार चैनपुर (बिहार) ******************** आया जी आया रक्षाबंधन का त्यौहार, भाई-बहनों के प्यार का त्यौहार आया, जीवन के जन्मों-जन्मों का साथ लेकर आया, बहना भाई के जीवन की रक्षा का मनु-हार लेकर आया, आया रे आया रक्षाबंधन का त्यौहार लेकर आया संसार के हर दुखों से भाई की रक्षा का वचन लिया, जन्म से लेकर मृत्यु तक जीवन की रक्षा का आशीर्वाद लेकर आया, हर संकट में हौसला बढ़ाती बहन भाई को आलोकित करने आयी, प्यार दुलार भाई पर लुटाती हमेशा प्यार लेकर आयी, आया रे आया रक्षाबंधन का त्यौहार लेकर आया, जीने की हजारों-हजार साल तक कामना लेकर आया, भाई के हर दुखों को हरने की दुआ लेकर आया, उनके सुखी जीवन की कामना करती दुलार लेकर आयी, अपना अमृत सागर सुख चैन लुटाती प्यार लेकर आयी, आया रे आया रक्षाबंधन का त्यौहार लेकर आया, बहन भाई की एक शान होती है, जीवन में हर परिस्थितियों स...
मेरा भाई
कविता

मेरा भाई

आस्था दीक्षित  कानपुर (उत्तर प्रदेश) ******************** घर के कोनों में, शिकायतें तमाम है। मेरा भाई, आतंक का दूसरा नाम है। जितना भी समझाओ, नसमझ ही रहता है। अक्ल वक्ल तो है नही, खुद को शहंशाह समझता है। 'बड़ी हूं मैं', मां कहती, फिर भी लड़ाई करता है। लड़ के जब थक जाता, सहारा फिर रोना बचता है। सोती जब आराम से, बाल नोंच के भागता है। मिठाई जल्दी खा कर, मेरे से बँटवारा करता है। कीड़े- मकोड़े जानवर, जाने क्या क्या नाम से बुलाता है। कोई ओर जो आंख उठाये, तो बेझिझक लड़ जाता है। पिट-पिटा के जब भी आता, संग मेरे सो जाता है। सारे भाई क्या होते ऐसे, मन में यही सवाल आता है? ये अगर घर में हो तो, आराम हराम है। मेरा भाई आतंक का दूसरा नाम है। पहले जानवर सा था जो, आज जेंटलमैन हो गया है। शहर की ऊंची इमारत में कहीं, नौकरी करने लगा है शू लेस बांधने में रोता था, अब दिक्...
स्नेह बंधन
कविता

स्नेह बंधन

संगीता सूर्यप्रकाश मुरसेनिया भोपाल (मध्यप्रदेश) ******************** आज रक्षाबंधन पर्व आया। चहुँओर अपार छाया। भाई बहनों उर उमंग लाया। संपूर्ण भारत रक्षा बंधन पर्व मनाया। रक्षाबंधन पर्व कोई बंधन नहीं। भाई बहन स्नेह पर्व है, एक छोटा सा रेशम धागा बांध। बहन-भाई प्रति प्रेम कर बांधती। भाई कलाई पर राखी बँधवा। रक्षासूत्र भाई कलाई पर बाँधते ही। भाई अभिभूत हो अनुभूत करता। बहन रक्षा हर पल करना। बहन अपने सर भाई स्नेह सदा। पाने की आस कर रक्षाबंधन पर्व पर। राखी भाई कलाई बांधने का हर संभव। प्रयत्न कर आगे बढ़ती निरंतर। भाई-बहन एक-दूजे प्रति अथाह स्नेह सिंधु हिलौरे उर उपजाता। बहन और भाई एक-दूजे मुख। हर्षित उमंग संग एक-दूजे के अधरों। पर मुस्कान लाता। भाई-बहन के अंतस में प्रेम का। झरना बहता जाता। यही है रक्षाबंधन का पर्व। स्नेह-बंधन से भर जाता। जन्म संग जन्मों का ...
अमृत महोत्सव आजादी का
कविता

अमृत महोत्सव आजादी का

डॉ. निरुपमा नागर इंदौर (मध्यप्रदेश) ******************** अमृत महोत्सव है आजादी का अपना मिल जुल कर हम इसे मनाएं शान से तिरंगा घर घर लहराएं है यही स्वर्णिम सपना स्वर्ण महोत्सव है आजादी का अपना तीनों रंगों की शुभता पाएं जोश‌, शांति और समृद्धि लाएं रग रग में राष्ट्रभक्ति है जगाना स्वर्ण महोत्सव है आजादी का अपना हों जाएं नतमस्तक इस पर आंख न उठे दुश्मन की तिरंगे पर ऐसी नज़र है भारतवासी को पाना स्वर्ण महोत्सव है आजादी का अपना रक्षा करने इसकी जो शहीद हुए मां भारती का अंक वो तो पा गए ना कुर्बानी है, उनकी भुलाना स्वर्ण महोत्सव है आजादी का अपना परिचय :- डॉ. निरुपमा नागर निवास : इंदौर (मध्यप्रदेश) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है। आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपने परिच...
आजादी का अमृत महोत्सव
कविता

आजादी का अमृत महोत्सव

राम प्यारा गौड़ वडा, नण्ड सोलन (हिमाचल प्रदेश) ******************** आओ आजादी का अमृत महोत्सव मनाएं नाचे गाऐं खुशियां मनाएं राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ बनाएं। ७५ वर्ष के सफर की कहानी जन-जन तक पहुंचाएं। हर घर की छत पर इस बार तिरंगा लहराऐगा हर बच्चा हर नागरिक कर्तव्य अपना निभाएगा। छोटे बड़े करोड़ों तिरंगे हवा संग जब लहराएंगे जनमानस के हृदय में देश भक्ति जगाऐगें। हमारी आन है तिरंगा देश की शान है तिरंगा तिरंगा है स्वाभिमान। तिरंगे से है अस्तित्व देश का तिरंगा हमारी पहचान। तिरंगा कभी न झुकने देंगे देनी पड़े चाहे जान। आओ सारे आजादी का अमृत महोत्सव मनाऐं नाचे गाऐं खुशियां मनाएं। अपनी पाठशाला से निशुल्क तिरंगा लेकर अपने घर की छत पर श्रद्धा पूर्वक लहराएं। गांव में सब को तिरंगें का महत्व बताएं सबके मन में देशभक्ति का भाव जगाऐं आओ अमृत महोत्सव मनाऐं।। परिचय :-  राम प्या...
अग्निवीर बन जाओ तुम
कविता

अग्निवीर बन जाओ तुम

प्रीतम कुमार साहू लिमतरा, धमतरी (छत्तीसगढ़) ******************** उठो जागो और भागो तुम सुख,चैन को त्यागो तुम देशहित में मर मिटने को अग्निवीर बन जाओ तुम आपस मे लड़ने से बेहतर देश के काम आओ तुम देकर अपना खून देश को अग्निवीर बन जाओ तुम दुश्मनो से टक्कर लेने सीमा पर डट जाओ तुम दुश्मन को मार भगाकर अग्निवीर बन जाओ तुम देश की रक्षा करते करते दुश्मनो से लड़ते लड़ते देश का यश गाओ तुम अग्निवीर बन जाओ तुम परिचय :- प्रीतम कुमार साहू (शिक्षक) निवासी : ग्राम-लिमतरा, जिला-धमतरी (छत्तीसगढ़)। घोषणा पत्र : मेरे द्वारा यह प्रमाणित किया जाता है कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है। आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपने परिचय एवं छायाचित्र के साथ प्रकाशित करवा सकते हैं, राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपनी कविताएं, कहानिय...
भाई-बहनी के त्यौहार
आंचलिक बोली

भाई-बहनी के त्यौहार

परमानंद सिवना "परमा" बलौद (छत्तीसगढ) ******************** छत्तीसगढ़ी भाई-बहनी के त्यौहार हे, छाये खुशियों के बौछार हे, बड़े-छोटे के आशिस पाइस, इही हमर संस्कृति अउ संस्कार ये.! छोटे से धागा जेमा बहनी के मया भराय हे, वहीं धागा के मान रखे भाई, बहनी के रक्षा जीवन भर करें.! भाई के मया बहनी बर जीवन भर रथे, रक्षाबंधन, तीजा-पोरा, बहनी भाई बर उपवास रथे.! रक्षाबंधन परिवारीक त्यौहार ये, नन्हे हो या बड़े सब्बो बर एक समान ये, बहनी बर भाई अउ परिवार के मया ही ओकर बर उपहार ये.! जतका अपन बहनी ला इज्जत सम्मान देथो, उतका दुसर के बहनी ला भी इज्जत करबे ते, होही समाज राष्ट्र के उत्थान हे.!! परिचय :- परमानंद सिवना "परमा" निवासी : मडियाकट्टा डौन्डी लोहारा जिला- बालोद (छत्तीसगढ़) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं म...
घर-घर तिरंगा
कविता

घर-घर तिरंगा

किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया (महाराष्ट्र) ******************** आई घर-घर तिरंगा मिशन बढ़े चलो की घड़ी आई घर-घर तिरंगा मिशन बढ़े चलो की घड़ी ७५ वें अमृत महोत्सव की मज़बूत कड़ी अगले २५ वर्षों की नई यात्रा की झड़ी समझो आत्मनिर्भर भारत की यात्रा आगे बढ़ी आई विजयी विश्व तिरंगा प्यारा झंडा ऊंचा रहे हमारा की झड़ी जय-जय भारत देश हमारा जय-जय भारत देश नारे से युवाओं की फौज खड़ी आत्मनिर्भर भारत ज़रूर बनेगा जब लगेगी ऐसी श्रृंखलाओं की लड़ी हुनर हाट लोकल फॉर वोकल बेस्ट फ्रॉम वेस्ट की लगेगी झड़ी युवाओं बुजुर्गों महिलाओं की जुड़ेगी कड़ी कौछलता का विकास होगा कार्यबल शक्ति होगी भारत की बड़ी रोज़गार की उमड़ेगी झड़ी स्वप्न साकार होंगे स्वावलंबन के खुशियों की जल्द आएगी वह घड़ी हर नागरिक को कारीगर के हौसले को जबरदस्त देनी होगी प्रोत्साहन की झड़ी हर नागरिक को स्थानीय के ...
राखी का धागा
कविता

राखी का धागा

डॉ. कोशी सिन्हा अलीगंज (लखनऊ) ******************** राखी धागा है शुभ्र स्नेह का निश्छल, निर्मल, निष्कलुष नेह का भोले बचपन की मोहक स्मृतियों का भोलेपन की नोंकझोंक भरी विसंगतियों का लड़ झगड़ कर मनाने का अपना हिस्सा बाँटने का सीखने व सिखाने का अनूठा बंधन है प्यार का तोड़े से टूटे नहीं, ऐसे प्यार का रचा बसा है इसमें अपनापन अन्तरंगता का अनोखापन। थाल सजा कर लाई बहना बाँधेगी आज राखी बहना अपने भाइयों की कलाइयों पर सृजेता की सूक्ष्म कलाइयों पर प्राणवन्त तुलसी की कलाइयों पर देश के प्रहरियों की कलाइयों पर राष्ट्र के सीमा रक्षकों की कलाइयों पर, देश के कर्णधारों की कलाइयों पर बहनों का रक्षा-सूत्र शुभ्र दिव्य उज्ज्वल परम पवित्र बने भंडार अजस्र शक्ति का ज्ञान चरित्र की महा युक्ति का सत्व गुणों के महा उत्थान का देश-प्रेम के महा प्रमाण का शुभ्र, शुभ-शुभ कल्याण का...