तुम तो तनमन में समाए हुए हो
अशोक पटेल "आशु"
धमतरी (छत्तीसगढ़)
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तुम तो तनमन में समाए हुए हो
मुझे पाने की तुमको जरूरत नही है।
तुम तो मेरे यादों समाए हुए हो
तेरी झलक पाने की जरूरत नही है।
मेरी आंखों में तुम तो बसी हो
तुम्हे पास आने की जरूरत नही है।
मेरी साया तुम ही तो बनी हो
तुम्हे पाने की मुझको जरूरत नही है।
मेरी चाहत मुहब्बत तुम्ही हो
मुझे कसमें खाने की जरूरत नही है।
मेरा प्यार हमसफर तुम ही हो
मुझे वादा करने की जरूरत नही है।
मेरे सपनो में नींदों में तुम ही हो
तेरा दीदार करने की जरूरत नही है।
मेरी हकीकत मेरी मुद्दत तुम हो
मुझे सफाई देने की जरूरत नही है।
परिचय :- अशोक पटेल "आशु"
निवासी : मेघा-धमतरी (छत्तीसगढ़)
सम्प्रति : हिंदी- व्याख्याता
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।
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