उपन्यास सम्राट प्रेमचन्द
सरला मेहता
इंदौर (मध्य प्रदेश)
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वाराणसी के पूत प्रेमचन्द
साहित्य के तेजस्वी नक्षत्र
उपन्यास चक्र के केंद्रबिंदु
भाव विचारों के महासिंधु
बीसवीं सदी के युग पुरुष
कला के धनी धनपत राय
आदर्शों से यथार्थ की ओर
नगरीय ग्रामीण सम्मिश्रण
दलितों, महिलाओं, कृषकों
सामाजिक परिवेश की ओर
चलती रही लेखनी निरंतर
कलम के नायाब सिपाही की
सेवासदन से हुआ आरंभ
अधूरा रह गया मंगलसूत्र
कर्मभूमि रंगभूमि गोदान
प्रेमाश्रम रूठीरानी गबन
कायाकल्प प्रतिज्ञा आदि
श्रृंखला उपन्यासों की बनी
देशभक्त व मूर्धन्य वक्ता थे
सफल कहानीकार भी थे
जो निर्धनता स्वयं ने झेली
उन्हीं के वे हिमायती थे
दलित निर्धन प्रताड़ित
ही सजीव हुए पात्र रूप में
समाजसुधार की दिशा में
विधवा शिवरानी से विवाह
निर्मला पात्र बनी विमाता
हर चरित्र लिया आसपास से
जीवंत चित्रण समाज का
समेटा पन्द्रह उप...