बरसात
रशीद अहमद शेख 'रशीद'
इंदौर (मध्य प्रदेश)
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जीवन के नवगीत मनोहर,
चारों ओर सुनाने आई।
प्यासी धरती की आशाएँ,
फिर बरसात जगाने आई।
बूँदों की मोती मालाएँ,
अंबर से भू तक आएँगी।
गहन घाटियों से शिखरों तक,
चाँदी की पर्तें छाएँगी।
तपते कण-कण को सुखदाई,
शीतलता पहुँचाने आई।
प्यासी धरती की आशाएँ,
फिर बरसात जगाने आई।
सावन में रिमझिम झड़ियाँ तो,
भादौ में घनघोर घटाएँ।
वन-उपवन में मेघपुष्प की,
बिखराएँगी रम्य छटाएँ।
नयनों को आकर्षक सुन्दर,
अनुपम दृश्य दिखाने आई।
प्यासी धरती की आशाएँ,
फिर बरसात जगाने आई।
मतवारी बदरी के पीछे,
कजरारे बादल आएँगे।
गाज गिरेगी जब अलगावी,
नीर नयन से बरसाएँगे।
प्रेमी युगलों को अनुरागी,
पाठ कठिन सिखलाने आई।
प्यासी धरती की आशाएँ,
फिर बरसात जगाने आई।
परिचय - रशीद अहमद शेख 'रशीद'
साहित्यिक उपनाम ~ ‘रशीद’
जन्मतिथि~ ०१/०४/१...