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भजन

राम नाम की मधुशाला (भाग- २)
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राम नाम की मधुशाला (भाग- २)

प्रेम नारायण मेहरोत्रा जानकीपुरम (लखनऊ) ******************** तुम अनन्य सेवक हो राम के, स्वांस स्वांस तेरी माला। तुलसी से लिखवा कर महिमा, "तुलसीदास" बना डाला। पीनेवाला ही तो नाम की, महिमा बतला सकता है। तुम बतलाते जाओ महिमा, लिख दूँ अमृत मधुशाला। नाम नशे में रहते हो तुम, क्यों बस यही बखान करो। सबके अन्तर करो प्रेरणा, राम नाम का पान करो। हनुमत इस अमृत मदिरा का, पकड़ा दो हर कर प्याला। हर घर मे हो साकी प्रभु का, वसुंधरा हो मधुशाला। मदिरालय की मदिरा चढ़ती, तो विवेक हर लेती है। राम नाम की मदिरा सबको, भक्ति का फल देती है। लग जाता पूरी श्रद्धा से, जो होकर के मतवाला। उसकी दृष्टि झूमा देती है, वो बन जाता मधुशाला। उस मदिरा का नशा चढ़े तो, नष्ट सभी कुछ होता है। नाम नशा जितना चढ़ता, मन उतना पावन होता है। नाम नशे में डूबके मीरा ने, विष अमृत कर डाला। नाम नशा सबपर चढ़ ...
नितिन राघव ने अपनी एक कविता में सम्पूर्ण रामायण का सबसे छोटा सारांश लिखकर बनाया इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड
धर्म, धर्म-आस्था, भजन, साहित्यिक, स्तुति

नितिन राघव ने अपनी एक कविता में सम्पूर्ण रामायण का सबसे छोटा सारांश लिखकर बनाया इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड

नितिन राघव बुलन्दशहर (उत्तर प्रदेश) ******************** बुलन्दशहर। राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच के रचनाकार २१ वर्षीय नितिन राघव बी.एड प्रथम वर्ष के छात्र हैं तथा अपनी लेखनी के द्वारा साहित्य की सेवा कर रहे हैं। आपने अब तक अनेक कविताएं, कहानियां और निबंध लिखें हैं। अपने इन्हीं कार्यों के लिए समय-समय पर विभिन्न संस्थाओं द्वारा सम्मानित भी हो चुके हैं। और अबकी बार उन्होंने एक और महान उपलब्धि हासिल की है, जिसके पता चलते ही उनके परिवार और गांव वाले खुशी से झूम उठे। २१ वर्षीय नितिन राघव ने अपनी एक कविता में सम्पूर्ण रामायण लिखकर इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज कराया और इसी के साथ उन लोगों की भी राह आसान कर दी जो रामायण को लम्बा ग्रन्थ होने के कारण पढ नहीं पाते थे क्योंकि इस भाग दौड़ भरी जिंदगी में लोगों के पास समय कम है परन्तु अब रामायण को एक ही कविता में पढा जा सकता है। इसी के साथ ...
राम नाम की मधुशाला (भाग- १)
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राम नाम की मधुशाला (भाग- १)

प्रेम नारायण मेहरोत्रा जानकीपुरम (लखनऊ) ******************** हनुमत तुमने ही पकड़ाई, राम नाम अमृत माला। अंतर में प्रेरणा जगाई, लिखूं नाम की मधुशाला। तुमसे बड़ा 'नाम' का साकी, नहीं कोई इस धरती पर । अमृत जाम बनाते जाना, पूरी हो ये मधुशाला। बहुत विघ्न आएंगे पथ में, तुम रक्षक बनकर रहना। विघ्नों पर तुम गदा चलाना, मेरे कर में दे माला। राम नाम हर स्वांस में तेरी, तुम हो सदा भरा प्याला। बतलाते जाना तुम महिमा, में तो बस लिखने वाला। हर घर मे अब राम नाम की, मदिरा को पहुंचाना है। हर जिव्हा को स्वाद चखाकर, मुक्ति मार्ग ले जाना है। जब हर कर में आजायेगा, राम नाम मधु का प्याला । तो हर आंगन बन जायेगा, राम नाम की मधुशाला। तुलसी ने बतलाया कलयुग में, बस नाम सहारा है। सभी संत बतलाते केवल, नाम ही तारण हारा है। इतना नाम पिलादो मुझको, हो जाऊं मैं मतवाला। मेरे रोम रोम से निक...
मर्यादा की मूरत राम
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मर्यादा की मूरत राम

सुधीर श्रीवास्तव बड़गाँव, गोण्डा, (उत्तर प्रदेश) ******************** माँ कौशल्या की कोख से नृप दशरथ सुत जन्में राम। नवमी तिथि चैत्र मास को अयोध्या का था रनिवास।। निहाल हुए अयोध्यावासी, बजने लगी चहुंओर बधाई। जन जन के अहोभाग्य हो, मानुज तन ले प्रगटे रघुराई।। माता पिता की करते सेवा नित, न्योछावर थे खुशियों की खातिर। छोड़ दिये सुख राज महल के, माँ कैकई के दो वचन खातिर।। पिता की आज्ञा मान गये वन, विश्व बंधुत्व का भाव भर कर। जनकसुता का किया वरण, शिव धनुष भंग स्वयंवर में कर।। चौदह वर्षों के वनवास काल में, राक्षसों, दैत्यों का संहार किया। शबरी के जूठे बेरों को खाकर, नवधा भक्ति दे उद्धार किया. पुत्र, भाई, दोस्त की बने मिसाल, सबकी चिंता को मन में लाये। अपनी चिंता का ध्यान न कर, रावणवध से आतंक मिटाए।। पर ज्ञानी रावण की विद्वता को, अंतरमन से स्वीकार ...
श्री लधूनेश्वर महादेव
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श्री लधूनेश्वर महादेव

सुरेश चन्द्र जोशी विनोद नगर (दिल्ली) ******************** कूर्मावताराभिधान जनपद में, लधून महादेव तीर्थ है | चंद राजार्चित महादेव का, लधून महादेव तीर्थ है || होती समर्पित नवबाल जहाँ, लधून महादेव तीर्थ है | वैशाख शुक्ल चतुर्दशी जाते, श्री लधून महादेव तीर्थ हैं || कर समर्पण नवान्न नैवेद्य, होता वहाँ महादेवार्चन है | होती अपरा बृहत्पूजा जहाँ, लधून महादेव तीर्थ है || कार्तिक शुक्ल चतुर्दशी, जागरण होता बैकुण्ठ चतुर्दशी | होता बृहत्मेलायोजन सदा, तिथि कार्तिक शुक्ल की चतुर्दशी || कर शिवार्चना तृतीय प्रहर, लधून महादेव तीर्थ पर हैं | रुद्र यज्ञ होता संपन्न जहाँ, लधून महादेव तीर्थ है || बैठ ध्यान में लिंग शक्ति के, देवियां मांगती जहां वरदान हैं | अद्भुत धाम महादेव का, लधून महादेव तीर्थ है || उषाकाल ले भास्कर किरण, आता डोला लधूनेश्वर का है | जहां भक्त परिक्रमावलोकन करें,...
माँ दुर्गा स्तुति
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माँ दुर्गा स्तुति

प्रमोद गुप्त जहांगीराबाद (उत्तर प्रदेश) ******************** ॐ ह्रीं दुंदुर्गाये नमः, नमस्कार स्वीकार करो ! मुझे भँवर से पार करो माँ, तुम मेरा उद्धार करो । धूं धूं धूमावती ठ ठ, सारे सुख प्रदान करो, करो क्षमा माँ मेरी गलती, और मेरा कल्याण करो । सब की सब बाधाएँ हर लो, दूर क्लेश-विकार करो, रोग-मुक्त, सुख-शान्ति युक्त, माँ मेरा परिवार करो । मेरे अंधकार को हर लो, जय ज्योति माँ जय ज्वाला, मुझको इतनी श्रद्धा दे दो, हो जाऊं मैं मतवाला । मुझे गति दो श्रेष्ठ-मार्ग पर, आगे ही बढ़ता जाऊं, नहीं क्षति हो चाहे मैं, चट्टानों से टकरा जाऊं । लक्ष्मीवान, यशवान बनूँ मैं, ऐसे कर्म कराओ माँ, कोई न शत्रु रहे जगत में, ऐसा ज्ञान सिखाओ माँ । तुझमें और कर्म में मेरी, पूरी-पूरी निष्ठा हो माँ, कोई कटु शब्द ना बोले, हाँ ऐसी प्रतिष्ठा दो माँ । जय अम्बे, जगदम्बे माता, अच्छे मेरे विचार कर...
जय हो माता महागौरी
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जय हो माता महागौरी

संगीता सूर्यप्रकाश मुरसेनिया भोपाल (मध्यप्रदेश) ******************** नवरात्रि मां दुर्गा आठवीं शक्ति, तू महागौरी। कहलाती, मां तेरा रूप। अवर्णनीय, अतुलनीय तेरा। पूर्ण गौर वर्ण। मां तू शंख चंद्र अरू कुंद। पुष्प सम शश्वेत गौरवर्ण कांतिमान शोभित। मां तेरे सकल वस्त्र, आभूषण। शश्वेत धवल, दिव्य जगमग करें। मां तू बैल पीठ सवार विराजित। मां तू चतुर्भुजाधारी। ऊपर दाँया कर अभय मुद्रा। नीचे दाँया कर अरू मुद्रा संग अति शांत मुद्रा सोहै। मां ऊपर बाँये कर डमरु अरु। नीचे बाँये कर वर मुद्रा सोहै। मां तेरी शक्ति अमोघ फलदाई। तेरी आराधना उपासना। हम सब को पाप मुक्त करें। तेरा भक्त पावन अक्षय पुण्य। अधिकारी बने। तू जगत माता हम सबकी। मां तू महाकाली दुर्गा रूप। शरण आने वाले का तू। संकट मिटावै। शनिवार तेरी पूजन जो करै। उसके बिगड़े कारज सुधारै। जय हो माता महागौरी तेरी। ...
शैलपुत्री
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शैलपुत्री

संगीता सूर्यप्रकाश मुरसेनिया भोपाल (मध्यप्रदेश) ******************** नवरात्र प्रारंभ प्रथम। दिवस माता शैलपुत्री। भारत भू आगमन। हम सब करें पूजन वंदन। तुम माता शैलराज। हिमालय पुत्री शैलपुत्री। कहलाए तुम संग दुर्गा पूजा। प्रारंभ तुम्हारा वाहन वृषभ। जिस पर विराज तुम आई। दाहिने कर त्रिशूल अरु बाँए। कर कमल पुष्प सोहे। प्रथम दिवस उपासना में योगी। स्व मन मूलाधार चक्र स्थित कर। योग साधना आरंभ कर। माता शैलपुत्री सुमिरै। रोली, अक्षत लगा भोग लगा। मां शैलपुत्री मनावे। आशीर्वाद पावे। परिचय :- श्रीमती संगीता सूर्यप्रकाश मुरसेनिया निवासी : भोपाल (मध्यप्रदेश) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है। आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपने परिचय एवं छायाचित्र के साथ प्रकाशित करवा सकते हैं, राष्...
नवरात्रि आई रे
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नवरात्रि आई रे

शैलेष कुमार कुचया कटनी (मध्य प्रदेश) ******************** दरबार सजा है माता का सिंह पर सवार होके आई माता रानी भीड़ लगी है मंदिर में माता की पूजा करलो माता विनती सबकी सुन लो नवरात्रि आई रे नवरात्रि आई जगह जगह माता है विराजे माँ के दर्शन कर लो नर नारी सब भोग लगावे हलुआ पूरी माता को खिलावे नवरात्रि आई रे नवरात्रि आई माता प्यारी प्यारी दुःखो को हरने वाली माता का जो व्रत रखता है माता के प्रतिदिन दर्शन करता है। उसकी झोली कभी ना होती खाली नवरात्रि आई रे नवरात्रि आई माता सबकी पूरी मुरादे कर दो सुखी सारे संसार कर दो जगह जगह भंडारे होवे कन्या भोज लोग करावे नवरात्रि आई रे नवरात्रि आई परिचय :-  शैलेष कुमार कुचया मूलनिवासी : कटनी (म,प्र) वर्तमान निवास : अम्बाह (मुरैना) प्रकाशन : मेरी रचनाएँ गहोई दर्पण ई पेपर ग्वालियर से प्रकाशित हो चुकी है। पद : टी, ए वि...
गणेश वंदना
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गणेश वंदना

रमेशचंद्र शर्मा इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** जय बप्पा गणेशा, सकल विश्व विशेषा रिद्धि सिद्धि प्रदाता, शुभंकर श्री गणेशा !... विघ्न विनाशक देवा, गज महाकाय सेवा, सर्व मंगल मूर्ति देवा, लंबोदर मोदक मेवा, नाशो दुख कलेशा !..... मूषक यान प्रणेता, अखिल विश्व विजेता, वेद शास्त्र अध्येता, स्वाध्याय दान देता, भांति भांति गणवेशा !.... शील स्वभाव भंडारी, सदा प्रसन्न उपकारी, धीर उदार जय कारी, भव ताप भय हारी, कल्याणक उपदेशा !... एकदंत हर पीरा, गजा धारी शरीरा, महाधीर वीर गंभीरा, सिंदूर वदन शरीरा, मन मंदिर कर प्रवेशा !.... गोरा पुत्र आज्ञाकारी, भोले सुत बलिहारी, सुख संपदा के स्वामी, माता पिता अनुगामी, सुख समृद्धि प्रदेशा !..... सर्व ज्ञाता अंतर्यामी, दीनदयाल शुभनामी, शांत धीर सुविचारी, प्रथम पूज्य अधिकारी, सकल ज्ञान अन्वेशा !... मंगल मूर्ति व...
गणेश जी की वंदना
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गणेश जी की वंदना

प्रेम नारायण मेहरोत्रा जानकीपुरम (लखनऊ) ******************** गणेश जी की वंदना हे प्रथम पूज्य गजराज, तुम्हारी जै जै हो। है पार्वती के लाल, तुम्हारी जै जै हो। है प्रथम पूज्य ... प्रभु तुम बुद्धि के दाता हो, और तुम ही भाग्य विधाता हो। मंगल करते सब काज, तुम्हारी जै जै हो। है प्रथम पूज्य... रिद्धि सिद्धि के स्वामी हो तुम, जग के अंतरयामी हो तुम। तुम रखते सबका ध्यान, तुम्हारी जै जै हो। है प्रथम पूज्य... विघ्न विनाशक नाम तुम्हारा, हम भक्तो को तेरा सहारा। हैं चरण तेरे सब धाम, तुम्हारी जै जै हो। है प्रथम पूज्य ... परिचय :- प्रेम नारायण मेहरोत्रा निवास : जानकीपुरम (लखनऊ) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है। आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपने परिचय एवं छायाचित्र के साथ प्रकाशित करवा स...
कृष्णा
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कृष्णा

आशीष कुमार मीणा जोधपुर (राजस्थान) ******************** शब्दों मे तुझे बाँध न पाऊँ बुद्धि से तुझे माप न पाऊँ कैसे तेरी थाह लगाऊं मैं क्या लिखुँ तुझको प्रभु। कृष्ण लिखुँ, गोविंद लिखुँ केशव, माधव, कुँज लिखुँ बृजनन्दन, घनश्याम लिखुँ तुमको राधे श्याम लिखुँ मैं क्या लिखुँ तुझको प्रभु। यशोदा का लाल लिखुँ नाग कालिया काल लिखुँ सुदामा सखा बाल लिखुँ कंस का अंतकाल लिखुँ मैं क्या लिखुँ तुझको प्रभु। अर्जुन का गीता ज्ञान लिखुँ द्रोपदी का ध्यान लिखुँ मीरा का गिरधर गोपाला विष बना अमृत का प्याला मैं क्या लिखुँ तुझको प्रभु। तुमको नन्द किशोर लिखुँ या फिर माखन चोर लिखुँ मुख में ब्रह्मांड दर्शन लिखुँ या फिर चक्र सुदर्शन लिखुँ मैं क्या लिखूँ तुझको प्रभु। परिचय :- आशीष कुमार मीणा निवासी : जोधपुर (राजस्थान) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौल...
कान्हा से उलाहना
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कान्हा से उलाहना

प्रेम नारायण मेहरोत्रा जानकीपुरम (लखनऊ) ******************** कान्हा गोकुल में माखन खिलाया नही, कैसे मानूँ की माखन खिलाते हो तुम। किसी छीके पे माखन टंगा ही नहीं, कैसे मानूँ की माखन चुराते हो तुम। कान्हा गोकुल.... तेरी किरपा से आया हूँ ब्रजधाम में, वो ही आता है जिसको बुलाते हो तुम, आस्था तेरे चरणों मे जिसकी घटी, उससे तत्काल ही रुठ जाते हो तुम। कैसे मानूँ कि.... सब हैं राधा को तेरी नमन कर रहे, इसलिए सबमें ही नज़र आते हो तुम, जो भी तेरे लिए है तड़पता यहां, उसके अंतर में फौरन समाते हो तुम। कैसे मानूँ.... गायें गोकुल की तो कहीं जाती नहीं, दूध माखन कहाँ चला जाता है फिर। तुमको सब ज्ञात है, दृष्टि व्यापक तेरी, देखना है कि कब रोक पाते हो तुम। कैसे मानूँ की .... तेरे गोकुल का प्रसाद माखन नहीं, इसलिए तुमसे शिकवा किया "प्रेम" ने, तुमने ग्वालों को माखन खिलाया बहुत, दे...
कान्हा को जन्मदिन आयौ
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कान्हा को जन्मदिन आयौ

संगीता सूर्यप्रकाश मुरसेनिया भोपाल (मध्यप्रदेश) ******************** कान्हा को जन्मदिन आयौ कान्हा को जन्मदिन हम। सबकौ लगे प्यारो अरू अति न्यारो। हम सबके उर उमंग। उल्लास भी। संग में लायौ। कान्हा को जन्मदिन आयौ। मैं तो बहु नाचूंगी गाऊगी। बहु खुशियां मनाऊंगी। कान्हा कौ जन्मदिन आयौ। मौरो कान्हा आएगो। बांसुरी बजाएगौ, हम सब। बासुरी धुन सुन कान्हा प्रेम। मगन हो सुध-बुध खो जावेगै। कान्हा आवैगो हम सबकी पीरा। हरेगो, हम सबकी इच्छा पूरी करेगो। कान्हा को जन्मदिन आयौ। कान्हा हम सबन कौ दर्शन देवेगो। कान्ह आवेगो हम सबको करोना। मुक्त करेगो वो हम सबको सादो। जीवन वापस करेगो। कान्हा को जन्मदिन आयौ। अति प्यारौ अरू। अति न्यारो हम सब के उर। उमंग उल्लास लायौ, मै तो बहु नाचूँगी। गाऊँगी, कान्हा को जन्मदिन मनाऊँगी। कान्हा के दरस पा सुध-बुध। खो वाए। एकटक अपलक न...
पधारे हैं नंदलाला
कविता, भजन

पधारे हैं नंदलाला

नंदिता माजी शर्मा मुंबई, (महाराष्ट्र) ******************** मुक्त करने जननी को, पावन करने अष्टमी को, जोड़ने कर्ता से करनी को, देखो ! पधारे हैं नंदलाला... यशोदा के चंचल लला, बांधे मोर, मुकुट, छल्ला, गोकुल में मचाने हो-हल्ला, देखो ! पधारे हैं नंदलाला... हाथ में बिराजे हैं बंसी, हर्षित हो झूमे पशु पंछी, अधरो में मुस्कान यदुवंशी, देखो ! पधारे हैं नंदलाला... धेनूओं के निशदिन रखवाले‌, गोपियों के नटखट ग्वाले, नित नव लीला धरने निराले, देखो ! पधारे हैं नंदलाला... राधिका के सखा मुरलीधर, रुक्मिणी के पति परमेश्वर, मीरा के इष्ट देव गिरिधर, देखो ! पधारे हैं नंदलाला... सिखाने जग को प्रेम का रास, भरने जन-जन में उल्लास, सबको रंगने प्रेम, दया,विश्वास, देखो ! पधारे हैं नंदलाला... परिचय :- नंदिता माजी शर्मा सम्प्रति : प्रोपराइटर- कर्मा लाजिस्टिक्स निवासी :...
तुम हो अपरिभाषित
कविता, भजन

तुम हो अपरिभाषित

श्रीमती क्षिप्रा चतुर्वेदी लखनऊ (उत्तर प्रदेश) ******************** कारागार में जन्म लिया, गोकुल का ललना बनकर, देवकी मां की गोद मिली, यशोदा मां का मिला दुलार, वासुदेव के तनय बने तुम, नंद के गोपाल कैसे लिखूं!! क्या लिखूं!! तुम तो हो अपरिभाषित, चाहे मैं जितना लिखूं ।। हे नंद के लाल ।। गोपियों के प्रिय बने, राधा के प्रियतम , रुक्मिणी के श्री हो, सत्यभामा के श्रीतम, राक्षसों का वध किया, संसार को निर्मल किया, हर जन जन को मोहित किया, अपना सबकुछ त्याग दिया, कैसे लिखूं !! कितना लिखूं!! तुम रहोगे अपरिभाषित चाहे मैं जितना लिखूं ।। हे नंद के लाल ।। आत्म तत्व के चिंतन तुम, परमेश्वर परमात्मा तुम स्थिर चित्त योगी तुम्हीं, परमार्थ का अर्थ तुम्हीं। नभ जल अग्नि वायु, बनकर प्राण तुम्हीं बन जाते हो, पंचतत्व में विलीन हो, अजर अमर कहलाते हो, क्या लिखूं, कितना लिखूं त...
कृष्ण अवतार
गीत, भजन

कृष्ण अवतार

संजय जैन मुंबई (महाराष्ट्र) ******************** हम तेरे दर्शन को आये है बहुत दूर से कृष्ण। सिर्फ एक बार मुझे चरण को छू लेने दो। हम तेरे दर्शन को आये है बहुत दूर से कृष्ण।। रोज सपने में दिखते हो मुझे प्यारे कृष्ण। कहाँ है पर है नहीं तेरा ठिकाना मेरे कृष्ण। किस जगह की छवि मुझे रोज दिखते हो। उस जगह पर मुझे तुम बुला लो कृष्ण।। हम तेरे दर्शन को आये है बहुत दूर से कृष्ण।। अपनी आँखों से तुम देखते हो जग से। हर किसी पर तेरे दृष्टि रहती है कृष्ण। मेरे आँखों में भी दिव ज्योति दे दो। ताकि मैं सुबह शाम तेरे दर्शन कर सकूँ।। हम तेरे दर्शन को आये है बहुत दूर से कृष्ण।। अपनी लीलाएं दिखाकर सबको लूभाते हैं। खेल-खेल में अंत राक्षको का कर दिया। और कंस मामा को भी संदेश देते गए। फिर एक दिन क्रीड़ा के द्वारा ही कृष्ण ने। कंस का वध करके मथुरा को मुक्त किया।। हम तेरे दर्शन को आये है बहु...
जग के पालन हार
भजन

जग के पालन हार

रामसाय श्रीवास "राम" किरारी बाराद्वार (छत्तीसगढ़) ******************** सजल- मात्रा- २२ जग के पालन हार धरा पर आये हैं । सांवरिया सरकार धरा पर आये हैं ।। द्वापर में था दुष्टों का आतंक बड़ा । यमपुर उन्हे पठाने को वे आये हैं ।। भव के सारे बंधन को जो हरते हैं । आज वही कारागृह में खुद आये हैं ।। भक्तों के भगवान् देवकी के लाला । मानव तन धर लीला अजब दिखाये हैं ।। बाल लीला दिखलाये जाकर के ब्रज में । नंद यशोदा के कान्हा कहलाये हैं ।। ग्वाल बाल संग खेले यमुना के तट में । बैठ कदंब तरू मुरली मधुर बजाये हैं ।। माखन खूब चुराये ग्वालों के संग में । गोकुल के गलियों में उधम मचाये हैं ।। संग सखाओं के जाते गइया लेकर । वृंदावन में मोहन गऊ चराये हैं ।। चीर हरण कर दुनिया को वे सीख दिये । सखियों के संग में वे रास रचाये हैं ।। दुष्ट अनेकों का उनने संहार किया । भक्तों को ...
हनुमान जी से विनती
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हनुमान जी से विनती

प्रेम नारायण मेहरोत्रा जानकीपुरम (लखनऊ) ******************** मिला दो राम से हनुमत .... मिला दो राम से हनुमत, तेरा गुणगान गाएंगे। बताओगे जो भी युक्ति, उसे करके दिखाएंगे। मिला दो राम से ... प्रभु आराध्य हैं तेरे, मेरे आराध्य तो तुम हो। कृपा जो राम की पाया, उसे क्या कार्य दुष्कर हो। तेरी भक्ति फलित होगी, तो प्रभु भक्ति को पाएंगे। मिला दो राम से... तुम्ही ने की कृपा सुग्रीव पर, तो राम को पाया। दिया सेवा का अवसर और, उसे भय मुक्त करवाया। तेरी करुणा कृपा से ही, तो दिल मे राम आएंगे। मिला दो राम से... तेरे स्वामी की सेवा का, जो अवसर मैंने पाया है, तुम्ही से शक्ति लेकर के, उसे मैंने निभाया है। हैं जबतक प्राण तन में, हम तो ये सेवा निभाएंगे। मिला दो राम... परिचय :- प्रेम नारायण मेहरोत्रा निवास : जानकीपुरम (लखनऊ) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि मेरी यह...
शिव स्तुति
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शिव स्तुति

प्रेम नारायण मेहरोत्रा जानकीपुरम (लखनऊ) ******************** ॐ नमः शिवाय...... ॐ नमः शिवाय बोलो ॐ नमः शिवाय, इसी मंत्र के नित्य जाप से सकल काम बन जाय। बोलो ॐ नमः .... प्रभू राम ने सागर तट पर शिव की करी थापना, किया शिवार्चन और भोले से मन की कही कामना। करी प्रेरणा 'राम' लिखो तो हर पत्थर तर जाय। बोलो ॐ नमः.... प्रथम पूज्य हैं पुत्र इन्ही के, देवों में ये महादेव हैं। बेलपत्र और भांग धतूरा, संग पुष्प चढ़ते अनेक हैं। तू सावन भर जल अर्पित कर, इनकी भक्ति पाय। बोलो ॐ नमः.... रहते जब समाधि में स्थित, शिव हैं राम नाम को ध्याते। प्रभु राम होते प्रसन्न तो, इससे अक्षय शक्ति पाते। कुछ ना रखते पास में अपने, सब कुछ देत लुटाय। ॐ नमः शिवाय..... परिचय :- प्रेम नारायण मेहरोत्रा निवास : जानकीपुरम (लखनऊ) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलि...
शिव आराधना
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शिव आराधना

सुनील कुमार बहराइच (उत्तर-प्रदेश) ******************** शिव ‌भोले हम भक्त तुम्हारे बेआस-बेसहारे लो हम तो आ गए अब शरण में तुम्हारे शिव ‌भोले हम भक्त तुम्हारे मुफलिस गरीब हम हैं औकात क्या हमारी आन पड़ी है हम पर आज विपदा भारी मझधार में फंसे हैं मिलते नहीं किनारे शिव ‌भोले हम भक्त तुम्हारे लो हम तो आ गए अब शरण में तुम्हारे शिव ‌भोले हम भक्त तुम्हारे तेरी दया से चलती ये दुनिया सारी एक तुम ही दाता सारा जग है भिखारी हम पर दया जो कर दो बन जाए बिगड़ी हमारी शिव ‌भोले हम भक्त तुम्हारे बेआस-बेसहारे लो हम तो आ गए अब शरण में तुम्हारे शिव ‌भोले हम भक्त तुम्हारे दर से न तेरे लौटा कोई ले‌ के झोली खाली हम पर भी दया कर दो हे नीलकंठधारी बिगड़ी मेरी बना दो बस इतनी अरज हमारी दर पर तेरे खड़े हैं ले के झोली खाली झोली मेरी भी भर दो हे त्रिनेत्रधारी। परिचय :- सुनील कुमार निवासी ...
आदिदेव महादेव
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आदिदेव महादेव

महेन्द्र सिंह कटारिया 'विजेता' सीकर, (राजस्थान) ******************** श्रावण मास सोमवार को, भोले का यश गाना हैं। रख श्रद्धा आदिनाथ की, भवसागर तर जाना हैं।..... वंदन चंदन कर तिलक लगाएं, अर्पित करते पुष्पों की माला। आदिदेव महादेव का ध्यान धरें, सबके हित उत्तम करने वाला। गौरीशंकर भक्ति में चित्त लगाना हैं। रख श्रद्धा आदिनाथ की भवसागर तर जाना हैं।..... तात कार्तिकेय-गणनायक की, आभा बड़ी निराली हैं। मयूर केतु-गजानन की, छवि नैन सुखदायी हैं। माँ गिरिजा व विश्वनाथ का अलौकिक श्रृंगार करना है। रख श्रद्धा आदिनाथ की भवसागर तर जाना हैं।..... परिचय :- महेन्द्र सिंह कटारिया 'विजेता' निवासी : सीकर, (राजस्थान) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है। आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि राष्ट्रीय हिन्दी रक्ष...
गुरुदेव की भक्ति
गीत, भजन

गुरुदेव की भक्ति

संजय जैन मुंबई (महाराष्ट्र) ******************** भक्ति मैं करता तेरे साझ और सबेरे। चरण पखारू तेरे साझ और सबरे। चरण पखारू तेरे साझा और सबरे। तेरे मंद-मंद दो नैन मेरे मनको दे रहे चैन। तेरे मंद-मंद दो नैन...। क्या ज्ञान क्या अज्ञानी जन, आते है निश दिन मंदिर में। एक समान दृष्टि तेरी पड़ती है उन सब जन पर। पड़ती है दृष्टि तेरे उन सब पर। तेरे कर्णना भर दो नैन मेरे मनको दे रहे चैन। तेरी कर्णना भरे दो नैन मेरे मनको दे रहे चैन।। त्याग तपस्या की ऐसे सूरत हो। चलते फिरते तुम भगवान हो। दर्शन जिसको मिल जाये बस। जीवन उनका धन्य होता। जीवन उनका धन्य होता। तेरा जिसको मिले आशीर्वाद। उसका जीवन हो जाये कामयाब। तेरा जिसको मिले आशीर्वाद। उसका जीवन हो जाये कामयाब।। ऐसे गुरुवर विद्यासागर के चरणों में संजय करता उन्हें वंदन, करता उन्हें शत शत वंदन।। परिचय :- बीना ...
हनुमत्कृपा
भजन

हनुमत्कृपा

प्रेम नारायण मेहरोत्रा जानकीपुरम (लखनऊ) ******************** भक्त है हनुमान जी हैं दयालु बहुत, अपने भक्तों की चिंता वे करते सदा, उनके भक्तों को जग में सताते हैं जो, ऐसे दुष्टों पे चलती है उनकी गदा। भक्त... उनकी महिमा उन्ही को सुनाने के मित, उनके भक्तों ने कुछ सिद्ध मंदिर चुने, पूर्ण निर्विघ्न उनका ये संकल्प हो, इसलिए भक्तों ने ताने बाने बुने। आस्था जिनकी हो हनु के चरणों मे दृढ़, उनके मारग की कांटे वे चुनते सदा। भक्त... भक्तों को तीव्र गर्मी सता थी रही, हनु ने मेघों को आदेश था दे दिया। उनके आदेश को शीश धर मेघों ने, पाठ के दिनों मौसम सुहाना किया। झांक अंतर में सब कष्ट हरते है वो, ये ही हनुमान जी की निराली अदा। भक्त... राम सुमिरन करो, नित चालीसा पढ़ो, मन मे हनुमत की भक्त्ति पनप जायेगी। भक्ति में डूब पाया अगर तेरा मन, जग की कोई भी सुविधा नहीं भायेगी। कूप से निकलकर ...
शिव की महिमा
भजन

शिव की महिमा

धर्मेन्द्र कुमार श्रवण साहू बालोद (छत्तीसगढ़) ******************** आज मानव भी अपना तीसरा नेत्र तो खोलें, अंतरघट में बसे अंतर्यामी साक्षी से तो बोलें, वही त्रिलोचन तो ज्ञान चक्षुधारी शिव कहलाते हैं। समाज में फैले कुरीतियों को स्व-विवेक से भगायें, हर रोज नित नये आयाम लेकर सहजता से अपनायें। वही हर-हर महादेव शिव सिद्धीश्वर कहलाते हैं .... भौतिक जीवन को त्यागकर सत्य की अनुभूति करायें, भूत, भविष्य, वर्तमान तीनों कालों के रहस्य बतायें। वही हितकारी शिवशंभु त्रिकालदर्शी कहलाते हैं .... बारह मासों में एक बार सावन जरूर आते हैं, कल्याणकारी भोलेनाथ भी तो ससुराल आते हैं। वही पूजा-पाठ घर मंदिर ही शिवालय कहलाते हैं ..... रिमझिम फुहार ही तो विवेक वैराग्य जगाते हैं, झूठी मिथ्या कल्पनाओं को तो दूर भगाते हैं। वही जो जटा से ज्ञान की गंगा जटाशंकर बहाते हैं ...... रजो, तमो, सतो ...