
अख्तर अली शाह “अनन्त”
नीमच (मध्य प्रदेश)
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श्मशानो में देह धधकती,
कुछ लालच में अटके हैं।
दुनिया के बीहड़ में राही,
वे ही पथ से भटके हैं।।जिन पे जिम्मेदारी सौंपी,
दुनिया ने भगवान कहा।
चोरी पर सीना जोरी है,
देखो कैसे खटके हैं।।कुछ को राहत मिट्टी ने दी,
कुछ के साथ किया ऐसा।
इस दहरी से उस दहरी पे,
ले जाकर के पटके हैं।।उम्मीदों का दामन जिस-जिस,
ने भी छोड़ दिया हारे।
घर के पंखों पर शव उनके,
हमने देखा लटके हैं।।जिससे ताकत भू से पाई,
ताकतवर वे पेड़ रहे।
फूल उन्ही की शाखों पे तो,
बाधाओं में चटके हैं।।सब कुछ देकर भी जो खुश हैं,
मानवता के वाहक हैं।
लोग यहां कुछ ऐसे ही तो,
अलग सभी से हट के हैं।।
परिचय :- अख्तर अली शाह “अनन्त”
पिता : कासमशाह
जन्म : ११/०७/१९४७ (ग्यारह जुलाई सन् उन्नीस सौ सैंतालीस)
सम्प्रति : अधिवक्ता
पता : नीमच जिला- नीमच (मध्य प्रदेश)
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।
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