Sunday, September 22राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर आपका स्वागत है... अभी सम्पर्क करें ९८२७३६०३६०

भारत तिलक विवेकानंद!

डॉ. पंकजवासिनी
पटना (बिहार)
********************

हे संन्यासी हे अमर सपूत भारतवर्ष के!
आधार भारत माता के गर्व-हर्ष के!!

तुमने की थी युवा संन्यासियों की मांग
जो भारत भर के ग्रामों में फैल
देशवासियों की सेवा में जाएं खप!
आज भी सख्त प्रासंगिकता है तेरी इस मांग की
देश की बलिवेदी पर सहर्ष डालें हविष…
आज सभी युवा अपने अपने स्वार्थ की!

हे मनीषी! तेजोदिप्त संन्यासी!! हिन्दू धर्म के गौरवशिखर!!
हे आध्यात्मिक चिंतक! वेदांतों के समर्थ व्याख्याता!!
तूने धर्म को सदा रखा मनुष्य-सेवा के केन्द्र में
और देश के सर्वतोभावेन कल्याण का
कैसा विलक्षण-क्रांतिकारी उपाय सुझाया
“देश के ३३ कोटि भूखे-दरिद्र-कुपोषण के शिकार को
कर दो मंदिरों में स्थापित देवी देवताओं की तरह!
और हटा दो मंदिरों से देवी देवताओं की मूर्तियों को!!
फिर करो उनकी बेहतरी के लिए ईमानदार कोशिश!
क्या रंग निखरेगा धर्मप्राण भारत का जो ऐसी पावन पूजा हो!!

तुमने पुरोहितवाद, ब्राह्मणवाद, धार्मिक कर्मकांड व रूढ़ियों की
उडाई खिल्ली और विषंगतियों के खिलाफ किया युद्ध!
तुमने मानवता को कैसा कालजयी उद्बोधन दिया
“उठो! जागो!! और लक्ष्य-प्राप्ति होने तक न रुको!!”
नैतिकता का कैसा सर्वकालिक अनुकरणीय पाठ पढ़ाया!…
जब समर्पण के लिए आई विदेशी तरुण रमणी को
माँ पुकार, हे दुर्लभ युवा! स्वयं को उसका पुत्र कह दिया!!
देशहित का तेरे हृदय में था कैसा स्पृहणीय उबाल!
परिव्राजक बन, भारत संग पूरी धरती को दिया खंगाल!!

हे देदीप्यमान श्रेष्ठ संन्यासी! हे महान देशभक्त!!
तूने बताया सर्वप्रथम दुनिया को
भारतवर्ष नहीं संँपेरों और मदारियों के खेलों का देश!
भारतवर्ष नहीं कठपुतलियों औ जादू-टोनों का देश!!
पवित्र भारतवर्ष! धर्म और दर्शन की पूण्यभूमि है यह….
महात्माओं और ऋषियों की जन्मभूमि है यह….
संन्यास और दुर्लभ त्याग की भूमि है यह
मनुष्य-जीवन के सर्वोच्च आदर्श की भूमि है यह…
अनादिकाल से मनुष्य की मुक्ति की द्वार-भूमि है यह…
शिकागो, अमेरिका की विश्व धर्मसभा में ये सर्वप्रथम बता
भारत को विश्व के आध्यात्मिक गुरु के सर्वोच्च आसन पर
प्रतिष्ठित कर उसे गर्वीली सार्वभौमिक पहचान दिलाई!!
तेरा यह महती अवदान कभी न भूल पायेगा भारत महान
३९ के लघु जीवन में तुम जो कर गए कमाल
आनेवाली पीढियां शताब्दियों तक पाएंगी मार्गदर्शन
धरा पर तेरे अवतरण दिवस को मनाकर युवा दिवस!
नमन करते रहेंगे सदा हम हे भारत-भाल के चंदन-तिलक!!

परिचय : डॉ. पंकजवासिनी
सम्प्रति : असिस्टेंट प्रोफेसर भीमराव अम्बेडकर बिहार विश्वविद्यालय
निवासी : पटना (बिहार)
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है।


आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच पर अपने परिचय एवं फोटो के साथ प्रकाशित करवा सकते हैं, राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच पर अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि प्रकाशित करवाने हेतु अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, हिंदी में टाईप करके हमें hindirakshak17@gmail.com पर अणु डाक (मेल) कीजिये, अणु डाक करने के बाद हमे हमारे नंबर ९८२७३ ६०३६० पर सूचित अवश्य करें …🙏🏻

आपको यह रचना अच्छी लगे तो साझा जरुर कीजिये और पढते रहे hindirakshak.com राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच से जुड़ने व कविताएं, कहानियां, लेख, आदि अपने चलभाष पर प्राप्त करने हेतु राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच की इस लिंक को खोलें और लाइक करें 👉 👉 hindi rakshak manch  👈… राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच का सदस्य बनने हेतु अपने चलभाष पर पहले हमारा चलभाष क्रमांक ९८२७३ ६०३६० सुरक्षित कर लें फिर उस पर अपना नाम और कृपया मुझे जोड़ें लिखकर हमें भेजें…🙏🏻

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *