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डॉ. मुकेश ‘असीमित’
गंगापुर सिटी, (राजस्थान)
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आज का दिन भाई ऐसा तो कभी सोचा नहीं, दिन भर सब कुछ बढ़िया चल रहा है- घर भी, बाहर भी, बच्चे सेटल्ड, कोई अनुचित डिमांड कहीं से नहीं। लाइफ स्मूथ जैसे हाईवे पर चल रही सौ की स्पीड में कार। क्या हुआ आज मेरे दिन को, इतना बढ़िया दिन ! आज बीवी से भी कोई खटपट नहीं, घर पे काम वाली भी समय पर आ गई, वरना उसका गुस्सा मुझ पर ही निकलता। बेटे का भी कोई फोन नहीं आया। बेटे के फोन का मतलब, जैसे एटीएम मशीन में कार्ड लगाना होता है। मरीज भी बिना कोई उलझन भरे प्रश्न किए, चुपचाप मेरे बताए निर्देशों का पालन करते नजर आ रहे हैं। क्या बात है, आज स्टाफ भी समय पर आ गया। स्वीपर ने सफाई भी बढ़िया कर दी है। ओपीडी भी फुल है। शाम तक मेरे को थोड़ी सी घबराहट होने लगी। ये क्या हो रहा है आज? टेंशन क्यूँ नहीं है?
ऐसा कैसे हो सकता है? जीवन और वो भी इतना स्मूथ, ये कैसे संभव है? बहुत सोचने लगा, मेरे सोच की फिल्म धीरे-धीरे रिवाइंड होने लगी। मैंने अपना पूरा पास्ट खंगाला। टेंशनों के अंबार की परतें धीरे-धीरे खुलने लगीं। अभी पास्ट ने अपनी टेंशन का स्लाइड शो खत्म भी नहीं किया कि फ्यूचर आ धमका। लो, बेटा तुम और तुम्हे कोई टेंशन नहीं! ऐसा हो सकता है ! बेटी की कॉलेज की फीस भरनी है, नई प्रॉपर्टी के रजिस्ट्री के कागजात पूरे करने हैं, मकान में इतने दिनों से कोई किरायेदार नहीं आया, उसके लिए किरायेदार ढूंढने का इश्तहार देना है, नई बुक के प्रकाशक को इलस्ट्रेशन नहीं भेज पाने की टेंशन। ओह मै! एक अजीब संतुष्टि से भर गया जब मैंने येन केन प्रकारेन अपने इस टेंशन फ्री वर्तमान में आखिरकार टेंशन ला ही दी, साबित कर ही दिया की ऐसा हो ही नहीं सकता कि मेरी लाइफ टेंशन फ्री हो। इन सभी टेंशनों से घिरा, जब सिर थोड़ा सा भारी होने लगा, एक बड़े ही संतुष्ट भाव से स्टाफ को एक कड़क चाय लेकर आने को कहा। चाय भी निगोड़ी, इंतज़ार करती रहती है की उसे पीने का बहाना मिले। जब तक सिर में टेंशन से दर्द नहीं हो जाए, सर भारी नहीं हो जाए, चाय पीने का मजा ही नहीं आता।
निवासी : गंगापुर सिटी, (राजस्थान)
व्यवसाय : अस्थि एवं जोड़ रोग विशेषज्ञ
लेखन रुचि : कविताएं, संस्मरण, व्यंग्य और हास्य रचनाएं
प्रकाशन : शीघ्र ही आपकी पहली पुस्तक नरेंद्र मोदी का निर्माण : चायवाला से चौकीदार तक प्रकाशित होने जा रही है।
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।
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