
मनोरमा जोशी
इंदौर (मध्य प्रदेश)
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निज सर्वस्व चढा़येंगें,
देश समृद्ध बनायेंगें।
हम भारत के सजग प्रहरी
हम सोना उपजायेंगे।
अपना लहूँ बहाया तब,
यह आजादी मुस्काई है।
मेहनत और पसीने से,
यह हरियाली लहराई है।
दुशमन धूल मिलायेंगे,
घरती हरी बनायेंगे।
हम सोना उपजायेंगे।
भारत मां ने याद किया,
तब राणा शिवा हमीं तो थे
घाव घाव पर मरहम पट्टी,
सच्ची दवा हमीं तो थे।
हम तलवार उठायेंगे,
हल से महल सजायेंगे।
हम भारत के सजग प्रहरी
हम सोना उपजायेंगे।
अपना देश बचायेगें।
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है।
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