कविता
लिख तो सकता हूं
राजेन्द्र लाहिरी
पामगढ़ (छत्तीसगढ़)
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जानता हूँ तुम्हें गिला है
कि मैं तुम्हारे बारे में
क्यों नहीं लिखता,
तुम्हारा चाहने वाला
क्यों नहीं दिखता।
हाँ, लिख तो सकता हूँ
तुम्हारे रूप, श्रृंगार
और सौंदर्य पर,
भय, लोभ, लालच, मोह,
दया औ...
छंद
बिसुआ
नरेंद्र सिंह
मोहनपुर, अतरी, गया जी (बिहार)
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आज पर्व है सत्तूयानी।
इसे पवित तिथि कहते ज्ञानी।।
आज जगे जो रवि से आगे।
किस्मत तुरंत उसकी जागे।।
नमन करो पहले धरनी का।
लेना असीस...
उपन्यास
उपन्यास : मैं था मैं नहीं था : अंतिम भाग- ३१
विश्वनाथ शिरढोणकर
इंदौर म.प्र.
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उस दिन स्कूल में सोनू को मैने बडी शान से कहां, 'आज मैने राम मंदिर में पूजा की।'
'क्यों? उस घर के सब बडे कहां गए?' सोनू ने पूछा। सोनू को भी पता था कि वह घर मेरा नही है।' कितने सारे तो भगवान है वहां मंदिर में? तुमने कैसे की होगी प...
ग़ज़ल
पता बताना भूल गए
नवीन माथुर पंचोली
अमझेरा धार म.प्र.
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पता अपना बताना भूल गए।
हमें रस्ता दिखाना भूल गए।
किसी के साथ थोड़ी दूर जाकर,
हमारे साथ आना भूल गए।
हमारे सामने होकर गए पर,
नज़र हमसे मिलाना भूल गए।
जताए तो बहुत रिश्ते पुराने,
मगर उनको निभाना भूल गए।
कठिन...
जन्मदिवस
एयर इंडिया की हवाई यात्रा
माधवी तारे
लंदन
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मैं हर साल अपने बड़े बेटे के साथ कुछ समय रहने के लिए ब्रिटेन जाती हूं और इस बार आते समय मेरे ज्येष्ठ सुपुत्र ने कहा कि मां इस आपकी उम्र काफी है और एक दो दिन की यात्रा में आप थक जाओगी, सामान्य क्लास में बैठ कर आ...
