कविता
ऐ बारिश …
शिवदत्त डोंगरे
पुनासा जिला खंडवा (मध्य प्रदेश)
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ऐ बारिशों
तुम इंसाँ न बनो
यूँ मत करो
कि जब ज़मीं की साँसें
प्यास से थमने लगें
दरिया के दीदे सूख जाएँ
पेड़ों की हथेलियाँ दुआ में
उठकर बिखर जाएँ
तब तुम कहीं समंदर की
छतों पर
गीत गाती फिरो।
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छंद
कौन यहाॅं है साथ
निज़ाम फतेहपुरी
मदोकीपुर ज़िला-फतेहपुर (उत्तर प्रदेश)
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(दोहा उर्दू छंद)
इतना ग़ुरुर मत करो, कौन यहाॅं है साथ।
सब मरने के बाद में, छूकर धोते हाथ।।
जीवन तो इक वहम है, कर्मों का है खेल।
सच ...
उपन्यास
उपन्यास : मैं था मैं नहीं था : अंतिम भाग- ३१
विश्वनाथ शिरढोणकर
इंदौर म.प्र.
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उस दिन स्कूल में सोनू को मैने बडी शान से कहां, 'आज मैने राम मंदिर में पूजा की।'
'क्यों? उस घर के सब बडे कहां गए?' सोनू ने पूछा। सोनू को भी पता था कि वह घर मेरा नही है।' कितने सारे तो भगवान है वहां मंदिर में? तुमने कैसे की होगी प...
ग़ज़ल
बात थोड़ी आपकी
नवीन माथुर पंचोली
अमझेरा धार म.प्र.
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बात थोड़ी आपकी भाती तो है।
कुछ कवायद सच नज़र आती तो है।
क्या हुआ वो पेड़ जिस पर फल नहीं,
बैठकर कोयल वहाँ गाती तो है।
इस शहर से उस शहर को जोड़ने,
गाँव से होकर सड़क जाती तो है।
चाहतों का हो न हो चाहे असर,
देर ...
जन्मदिवस
एयर इंडिया की हवाई यात्रा
माधवी तारे
लंदन
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मैं हर साल अपने बड़े बेटे के साथ कुछ समय रहने के लिए ब्रिटेन जाती हूं और इस बार आते समय मेरे ज्येष्ठ सुपुत्र ने कहा कि मां इस आपकी उम्र काफी है और एक दो दिन की यात्रा में आप थक जाओगी, सामान्य क्लास में बैठ कर आ...
