कविता
अनुभूतियां
श्रीमती क्षिप्रा चतुर्वेदी
लखनऊ (उत्तर प्रदेश)
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आज इंसान
की अनुभूतियां
विकृत हो रही हैं,
स्मृतियाँ क्षत-
विक्षत हो गई हैं !
धर्म-कर्म-कर्तव्य
बिसर रहा है
"थोड़ा ठीक हो जाय"
ये प्रयास नहीं करते,
क्योंकि हमारी कल्पनायें
भी चोटिल हो चुकी ...
छंद
कौन यहाॅं है साथ
निज़ाम फतेहपुरी
मदोकीपुर ज़िला-फतेहपुर (उत्तर प्रदेश)
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(दोहा उर्दू छंद)
इतना ग़ुरुर मत करो, कौन यहाॅं है साथ।
सब मरने के बाद में, छूकर धोते हाथ।।
जीवन तो इक वहम है, कर्मों का है खेल।
सच ...
उपन्यास
उपन्यास : मैं था मैं नहीं था : अंतिम भाग- ३१
विश्वनाथ शिरढोणकर
इंदौर म.प्र.
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उस दिन स्कूल में सोनू को मैने बडी शान से कहां, 'आज मैने राम मंदिर में पूजा की।'
'क्यों? उस घर के सब बडे कहां गए?' सोनू ने पूछा। सोनू को भी पता था कि वह घर मेरा नही है।' कितने सारे तो भगवान है वहां मंदिर में? तुमने कैसे की होगी प...
ग़ज़ल
हमने हर दर्द को मुस्कान बना कर देखा
आनंद कुमार पांडेय
बलिया (उत्तर प्रदेश)
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हमने हर दर्द को मुस्कान बना कर देखा,
ज़िंदगी तुझको भी आसान बना कर देखा।
दिल में उम्मीद का इक दीप जलाए रखा,
हर एक अँधेरे को चराग़ बना कर देखा।
जो भी पत्थर थे, वो किरदार सिखाते ही रहे,
हमने हर ज़ख़्म को अरमान बना...
जन्मदिवस
एयर इंडिया की हवाई यात्रा
माधवी तारे
लंदन
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मैं हर साल अपने बड़े बेटे के साथ कुछ समय रहने के लिए ब्रिटेन जाती हूं और इस बार आते समय मेरे ज्येष्ठ सुपुत्र ने कहा कि मां इस आपकी उम्र काफी है और एक दो दिन की यात्रा में आप थक जाओगी, सामान्य क्लास में बैठ कर आ...
