कविता
कभी कभी सोचती हूँ मैं
श्रीमती क्षिप्रा चतुर्वेदी
लखनऊ (उत्तर प्रदेश)
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कभी कभी सोचती हूँ मैं
कौन हैं हम,
खुद को साबित करने के लिए
क्यों बनना चाहते हैं कुछ हम।
बाहर से रंगों से भरे हुए
तन की सजावट को
प्राथमिकता देते हैं हम
भले ही भीतर से खोखले हों
मगर रंगीन आवर...
छंद
सरस्वती वन्दना : पञ्चचामर छ्न्द
डॉ. भावना सावलिया
हरमडिया, राजकोट (गुजरात)
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पञ्चचामर छ्न्द
तुम्हें करूँ प्रणाम आठ याम मैं सुहासिनी।
लुभा रहा स्वरूप दिव्य आपका सुभाषिनी।
विमोहिनी सुतान छेड़ दो कि जो सुधा बने।
नया-भावयुक्त गी...
उपन्यास
उपन्यास : मैं था मैं नहीं था : अंतिम भाग- ३१
विश्वनाथ शिरढोणकर
इंदौर म.प्र.
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उस दिन स्कूल में सोनू को मैने बडी शान से कहां, 'आज मैने राम मंदिर में पूजा की।'
'क्यों? उस घर के सब बडे कहां गए?' सोनू ने पूछा। सोनू को भी पता था कि वह घर मेरा नही है।' कितने सारे तो भगवान है वहां मंदिर में? तुमने कैसे की होगी प...
ग़ज़ल
दम में नहीं है दम
निज़ाम फतेहपुरी
मदोकीपुर ज़िला-फतेहपुर (उत्तर प्रदेश)
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वज़्न- २२१ २१२१ १२२१ २१२
अरकान- माफ़ऊल फ़ाइलात मुफ़ाईल फ़ाइलुन
दम में नहीं है दम कोई फिर भी नहीं है कम।
हर शख़्स कह रहा है कि आगे रहेंगे हम।।
शेरो सुख़न की दुनिया में कुछ ऐसे खो गया।
सुख में...
जन्मदिवस
आनंद में डूबती उतरती अविस्मरणीय यात्रा
शकुन्तला दुबे
देवास (मध्य प्रदेश)
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प्रातः पांच पैंतालीस पर सुखद सुरक्षित यात्रा की कामना के साथ दीप प्रज्ज्वलित किया तब कल्पना भी नहीं थी कि अनुपम नैसर्गिक सौंदर्य हमारी बाट जोह रहा है। हमारे स्वागत के लिए बादल हल्की फूहा...
